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हाईकोर्ट का आदेश : शिक्षामित्र से शिक्षक बने याचियों की पुरानी पेंशन पर सचिव फैसला लें या पेश हों

Thu, 17 Jul 2025 09:32 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र से शिक्षक बने याचियों की पुरानी पेंशन की मांग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को चेतावनी दी है कि चार सितंबर तक याचिका में पारित आदेश के मुताबिक फैसला न लेने पर उन्हें कोर्ट में पेश होना होगा।
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अदालत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र से शिक्षक बने याचियों की पुरानी पेंशन की मांग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को चेतावनी दी है कि चार सितंबर तक याचिका में पारित आदेश के मुताबिक फैसला न लेने पर उन्हें कोर्ट में पेश होना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने रमेश चंद्र व 36अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है।

याचियों का दावा है कि प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2000 में शिक्षामित्र योजना शुरू की थी। इसके तहत विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में करीब पौने दो लाख युवाओं की तैनाती की गई। इनमें से हजारों शिक्षामित्र विभिन्न भर्तियों के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बन गए। वहीं, जो अप्रैल 2005 से पहले नियुक्त हुए और वर्तमान में शिक्षक हैं, उन्हें पुरानी पेंशन का हकदार माना जाना चाहिए।

याचियों ने इस मांग के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। नवंबर 2024 में कोर्ट ने याचियों के दावों पर बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को तीन महीने में फैसला लेने का आदेश दिया था, लेकिन याचियों का प्रत्यावेदन अब तक निस्तारित नहीं किया गया। इसके खिलाफ याचियों ने अवमानन याचिका दाखिल किया है। 

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