कोर्ट में प्रश्न था कि क्या श्रम न्यायालय ने प्रारंभिक बिंदु न तय कर संयुक्त बिंदुओं को तय कर गलती की है। विपक्षी श्रमिक अजेंद्र कुमार पर बिना सूचना दिए बगैर इकाई में धरना प्रदर्शन कर तोड़फोड़ करने का आरोप है। कंपनी 5.45 से 1.30 बजे तक बंद रही। लाखों का नुक़सान करने तथा अधिकारियों से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया। घरेलू जांच में साक्ष्य लिए गए। आपत्ति का मौका दिया गया। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की गई।
श्रमिक से इसका स्पष्टीकरण मांगा गया। सफाई पेश नहीं की तो बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। जिसे लेबर कोर्ट में चुनौती दी गई। लेबर कोर्ट ने बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में कंपनी ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने लेबर कोर्ट का आदेश रद्द कर प्रारंभिक बिंदु तय कर नए सिरे से कार्यवाही करते हुए निर्णय लेने का निर्देश दिया है।