इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शेयर ब्रोकर और निवेशक के बीच उपजे वित्तीय विवाद का निपटारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (सेबी एक्ट) के तहत किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर गबन और धोखाधड़ी का मामला केवल एक ही आरोप के आधार पर आपराधिक न्यायालय में नहीं चलाया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता ने आगरा के जितेंद्र कुमार केसवनी के खिलाफ हरी पर्वत थाने में दर्ज मुकदमे को रद्द करते हुए दिया। मेसर्स एलडीके शेयर एंड सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जितेंद्र के खिलाफ शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शेयर ब्रोकर होने के नाते याची ने उसे अपनी कंपनी के माध्यम से शेयरों में निवेश और व्यापार करने के लिए कहा था। शिकायतकर्ता ने निवेश किया। लेकिन उसके 9,69,450 रुपये वापस नहीं हुए।