इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जो कोई भी कोर्ट आये सभी तथ्यों के खुलासे के साथ आये, भले ही वे उसके खिलाफ ही क्यों न हो। कोर्ट ने गुमराह करने वाले तथ्यों के साथ निलंबन की चुनौती में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया और 25 हजार रुपये हर्जाने के साथ याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने देवेंद्र सिंह मौर्य की याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने याची को चार हफ्ते में हर्जाना राशि विधिक सेवा समिति के पक्ष में जमा करने का निर्देश दिया है। जमा न करने की दशा में पुलिस आयुक्त कानपुर नगर याची से वसूल कर जमा कराएं। याची देवेंद्र सिंह मौर्य का कहना था कि उसे 30 अगस्त 22 को निलंबित कर दिया गया और 24 नवंबर 22 को कारण बताओ नोटिस का जवाब भी दिया है। 21 दिसंबर 22 को जांच रिपोर्ट भी दाखिल हुई है। किंतु कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता से जानकारी मांगी।
बताया कि 16 जनवरी 23 को कारण बताओ नोटिस दिया गया है किंतु याची ने जवाब नहीं दिया है। इंतजार किया जा रहा है। सवालों के जवाब नहीं आये, कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की गई। इस पर कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रवण कुमार दूबे से पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर से सफाई पेश करने को कहा। जिस पर पुलिस कमिश्नर ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि याची ने सही तथ्य नहीं बताये हैं, कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। दो अलग मामलों को मिलाकर तथ्य दिए हैं। इसके बाद याची की तरफ से सही तथ्य न देने पर अफसोस जताया गया।
कोर्ट ने कहाकि याची ने स्वयं को पीड़ित होने के गुमराह करने वाले तथ्य दिए। अपर विधि परामर्शी से हलफनामा मांगा गया। कोर्ट को लगा कि याची पीड़ित है, जांच रिपोर्ट के बाद उसे निलंबित रखना ठीक नहीं है। पुलिस कमिश्नर के हलफनामे के बाद कोर्ट ने कहा याची स्वयं में स्वच्छ हृदय से कोर्ट नहीं आया है। सही तथ्य का खुलासा नहीं किया है। कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। इसलिए वह राहत पाने का हकदार नहीं हैं और हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।