इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों व उनसे जुड़े अस्पतालों में उचित बुनियादी ढांचे और संकाय सदस्यों की कमी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज और कानपुर के मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों को नोटिस जारी कर अस्पतालों में बुनियादी ढांचे और संकाय की कमी पर जानकारी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका पर दिया।
अदालत ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीन अप्रैल के आदेश के अनुपालन में दायर व्यक्तिगत हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया। हलफनामे के साथ संलग्न मेडिकल कॉलेजों की सूची में 42 कार्यात्मक राज्य मेडिकल कॉलेजों और उनमें बिस्तरों की संख्या का उल्लेख है।
हालांकि, न्यायालय ने पाया कि सूची में मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और संकाय का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है। इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए, न्यायमूर्ति ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा को एक बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनके संबद्ध अस्पतालों में मौजूद बुनियादी ढांचे और संकाय का पूरा विवरण स्पष्ट रूप से दिया जाए।
इस दौरान अदालत ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में उचित बुनियादी ढांचे की कमी है और संकाय सदस्यों के भी पर्याप्त पद खाली होने पर चिंता जताई। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने प्रयागराज और कानपुर के मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों को नोटिस जारी किया है। उन्हें अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे और संकाय का विस्तृत विवरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। प्रिंसिपलों को संकाय सदस्यों की रिक्तियों की संख्या और उनके कॉलेजों व अस्पतालों में आवश्यक बुनियादी ढांचे की जरूरतों का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 मई, 2025 की तारीख निर्धारित की है।