भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शहर उत्तरी से भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के खिलाफ दाखिल चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना है। कहा कि ठोस आधार के अभाव में ही याचिका प्रारंभिक स्तर पर खारिज की जा सकती है। मौजूदा मामले में कुछ तथ्य विचारणीय हैं। लिहाजा, मामले को गुणदोष के आधार पर निपटाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने याचिका पर उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों का आंशिक निस्तारण करते हुए वाद बिंदु बनाए जाने के लिए पांच मई की तारीख नियत की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की अदालत ने कांग्रेस प्रत्याशी रहे पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह की ओर से दाखिल चुनाव याचिका पर दिया है। 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में शहर उत्तरी से जीते हर्षवर्धन बाजपेयी के चुनाव को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति के गलत विवरण दिए हैं।
साथ ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी भी छिपाई है। इसे मतदाता भ्रमित हुए हैं। इनका यह आचरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। वहीं, हर्षवर्धन की ओर से याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए गए। प्रारंभिक आपत्ति की दाखिल अर्जी में कहा कि याचिका में कई तथ्य निरर्थक, अप्रामाणिक और अमर्यादित हैं। 2022 के चुनाव से पहले हुए चुनाव में दाखिल शपथ पत्रों का दिया गया हवाला औचित्यहीन है। लिहाजा, चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने हर्षवर्धन की प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर वर्ष 2007, 2012 और 2017 के चुनाव से जुड़े प्रस्तरों को हटा दिया। लेकिन याचिका को पूरी तरह खारिज करने से इन्कार कर दिया।