सार
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत ने आरोपी नितेश चौहान की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। आरोपी पर प्रेमिका की अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। मामला देवरिया के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। युवती के पिता ने आरोपी नितेश समेत उसके माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेमी की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवती की आत्महत्या मामले की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। देवरिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से पूछा है कि पुलिस अधिकारियों ने जब्त मोबाइल से पीड़िता के अश्लील वीडियो की बरामदगी के लिए कदम क्यों नहीं उठाए?
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत ने आरोपी नितेश चौहान की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। आरोपी पर प्रेमिका की अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। मामला देवरिया के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। युवती के पिता ने आरोपी नितेश समेत उसके माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
आरोप लगाया कि नितेश ने शादी का झांसा देकर उसकी बेटी के साथ तीन साल तक यौन शोषण करता रहा। इसी दौरान उसने युवती का अश्लील वीडियो भी बना लिया। युवती ने शादी के लिए कहा तो उसने इन्कार कर दिया। साथ ही युवती को अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। इससे घबरा कर युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने नितेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सत्र अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने मोबाइल तो जब्त किया। लेकिन, घटना के पांच माह बाद भी वीडियो की बरामदगी को लेकर पुलिस ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की। विवेचना से खफा कोर्ट ने एसपी देवरिया को हलफनामे पर इस लापरवाही की वजह और अब तक उठाए गए कदम की जानकारी 16 अक्तूबर तक देने का आदेश दिया है।