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High Court : हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला

Sat, 02 Aug 2025 05:39 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म व हत्या में मिली मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि सजा भुगत रहा युवक आपराधिक पृष्ठभूमि का नहीं है।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म व हत्या में मिली मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि सजा भुगत रहा युवक आपराधिक पृष्ठभूमि का नहीं है। यह नहीं कहा जा सकता है कि वह सुधरने योग्य नहीं है और समाज के लिए खतरा है। उसे सुधरने व पुनर्वास का मौका मिलना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने फिरोजाबाद के युवक की सजा के विरुद्ध अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर ली।

फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज में युवक पर 17 मार्च 2019 को आठ वर्षीय पीड़िता के साथ दुष्कर्म व हत्या करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने आठ वर्षीय पीड़िता को बहला-फुसला कर ले गया और दुष्कर्म कर हत्या कर दी। पीड़िता का शव गेहूं के खेत में मिला। ट्रायल कोर्ट ने इसे भयावह घटना मानते हुए दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि डीएनए जांच के लिए शव से लिए गए नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए कभी नहीं भेजा गया। पीड़िता उसकी चचेरी बहन थी, इसलिए उसके खिलाफ इस तरह का नृशंस कृत्य का कोई कारण नहीं था। केवल पीड़ित के साथ आखिरी बार देखे गए सबूत ही हैं, जो किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए निर्णायक नहीं है।

शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़ित को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था। ऐसे में आरोपी साक्ष्य अधिनियम के तहत यह बताने के लिए बाध्य है कि उसके बाद पीड़ित के साथ क्या हुआ। वह ऐसा करने में विफल रहा।

न्यायालय ने कहा कि अंतिम बार देखे जाने का तथ्य साबित हो जाने के बाद आरोपी पर यह समझाने का भार था कि उसने पीड़िता का कहां और कब छोड़ा लेकिन वह बताने में विफल रहा। इसलिए ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। आरोपी की कम उम्र और अंतिम बार एक साथ देखे जाने के परिस्थितिजन्य साक्ष्य को देखते हुए मौत की सजा को 25 साल के आजीवन कारावास में बदल दिया।

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