फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट की टिप्पणी : कर आरोपित करने पर पीड़ित को सुनवाई का अवसर नहीं दे रहे अधिकारी

Fri, 25 Apr 2025 01:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। कर या दंड आरोपित करने पर पीड़ित को सुनवाई का अवसर नहीं दे रहे हैं। अधिकारी रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखे बिना मशीन की तरह कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। कर या दंड आरोपित करने पर पीड़ित को सुनवाई का अवसर नहीं दे रहे हैं। अधिकारी रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखे बिना मशीन की तरह कार्य कर रहे हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में याचिकाएं दाखिल हो रही हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए एसजीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर गाजियाबाद के कर निर्धारण आदेश को रद्द करते हुए 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मेरिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई की। गाजियाबाद की याची कंपनी आलू फ्लेक्स निर्माता है, जिस पर एसजीएसटी अधिकारी ने उत्पाद को गलत वर्गीकरण करते हुए लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का कर आदेश पारित कर दिया। कंपनी ने व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की, लेकिन विभाग ने मौका नहीं दिया।

खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यदि करदाता व्यक्तिगत सुनवाई की लिखित मांग करता है तो प्रतिकूल आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। ऐसा न करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। कोर्ट ने एसजीएसटी ज्वाइंट कमिश्नर के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही विभाग के आयुक्त को निर्देश दिया कि अधिनस्थ अधिकारियों को विधि सम्मत कार्यप्रणाली अपनाने के लिए प्रशिक्षण दें।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें