इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना पीड़ित का पक्ष सुने आय प्रमाण पत्र रद्द करना नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने तहसीलदार के आदेश को रद्द कर आय प्रमाण पत्र के सत्यापन के मामले को वापस भेज दिया। कहा कि तहसीलदार याची को नोटिस जारी करेंगे जिसमें वह उनकी मदद करेगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अंजली दुबे की याचिका पर दिया। गाजीपुर के जखनिया तहसील निवासी याची आंगनबाड़ी में कार्यरत है। तहसीलदार ने 27 मार्च 2025 के आदेश से उसके आय प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया। कहा कि आय प्रमाण सबंधित हल्के के लेखपाल के बजाय दूसरे ने जारी किया है। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अधिवक्ता प्रिंस कुमार श्रीवास्तव ने दलील दी कि आय प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक की भूमिका खत्म हो जाती है। ऐसे में किसी भी गलती के लिए विभाग जिम्मेदार है, याची नहीं। तहसीलदार के आदेश से याची की नौकरी खतरे में है। वहीं, राज्य की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्रमाण पत्र धोखाधड़ी से जारी हुआ है। कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिवक्ता यह साबित करने में असमर्थ हैं कि याची को सुनवाई का अवसर दिया गया था।