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High Court : लेनदार की सहमति बगैर मध्यस्थ की नियुक्ति व पारित अवार्ड अवैध

Thu, 15 Aug 2024 02:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनेश चंद्र की ईड्रेड फाइनेंस प्रा.लि कंपनी व अन्य के खिलाफ दाखिल आर्बिट्रेशन अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लेनदार की सहमति बिना मध्यस्थ की नियुक्ति और उसकी ओर से पारित अवार्ड को अवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा पक्षों की सहमति या हाईकोर्ट के आदेश से ही मध्यस्थ नियुक्त किया जा सकता है। कंपनी अकेले मध्यस्थ की नियुक्त नहीं कर सकती।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनेश चंद्र की ईड्रेड फाइनेंस प्रा.लि कंपनी व अन्य के खिलाफ दाखिल आर्बिट्रेशन अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने दलील दी कि अपीलार्थी ने कंपनी से 70 लाख रुपये उधार लिए, जिसे 147500 रुपये प्रतिमाह किस्त पर वापस करना तय हुआ। वापसी में विवाद को तय करने के लिए मध्यस्थ नियुक्त करना था।

करार के मुताबिक लेनदार को एकल मध्यस्थ नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन, कंपनी ने लेनदार को बिना नोटिस व सहमति के मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। लेनदार की आपत्ति मध्यस्थ ने निरस्त कर दी और हर्जाने के साथ अवार्ड पारित किया। इसे कॉमर्शियल कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसे कोर्ट ने दाखिले में देरी के आधार पर खारिज कर दी। इसके खिलाफ अपीलार्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए कॉमर्शियल कोर्ट आगरा के आदेश को भी रद्द कर दिया है। साथ ही पक्षों को नये सिरे से दावे का आर्बिट्रेशन अधिकरण के निपटारा कराने की छूट दी है। 

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