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High Court : सरकारी वकीलों के दफ्तर में स्टाफ की कमी पर हाईकोर्ट नाराज, यूपी सरकार से मांगा जवाब

Sat, 14 Mar 2026 03:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यालय में लंबे समय से खाली पड़े पदों और स्टाफ की कमी को लेकर नाराजगी जताई है। कहा कि स्टाफ की कमी और फाइल के सही रखरखाव की व्यवस्था न होने से मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यालय में लंबे समय से खाली पड़े पदों और स्टाफ की कमी को लेकर नाराजगी जताई है। कहा कि स्टाफ की कमी और फाइल के सही रखरखाव की व्यवस्था न होने से मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है, जो न्याय प्रशासन में बाधा के समान है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सुबेदार यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

सुबेदार के मामले में सुनवाई के दौरान पहले कोर्ट को बताया गया था कि संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, जिस पर डीएम को तलब करने का निर्देश दिया गया था। बाद में अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि निर्देश व्हाट्सएप पर भेजे गए थे पर उन्हें डाउनलोड कर प्रिंट नहीं किया जा सका, जिससे गलती से यह कहा गया कि निर्देश प्राप्त नहीं हुए।

कोर्ट ने कहा कि हाल के समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि सरकारी विभाग समय पर निर्देश नहीं भेजते और सरकारी वकीलों के रिकॉर्ड भी अद्यतन नहीं रहते। फाइल समय से उपलब्ध न होने से अधिवक्ता कोर्ट को सही जानकारी नहीं दे पाते। इससे सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है।

शासकीय अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह स्थिति सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी के कारण है। नियुक्ति की प्रक्रिया राज्य सरकार की अनुमति से ही होती है। 

सरकारी बताए...खाली पदों के लिए क्या कदम उठाए जा रहे

कोर्ट ने राज्य सरकार और महाधिवक्ता कार्यालय से पूछा है कि सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यालय में खाली पदों पर भर्ती तेज करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में संबंधित सचिव अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल करें। ऐसा न करने पर कोर्ट इस मामले को गंभीरता से लेने के लिए विवश होगा।

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