इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक प्रेम संबंध में रहने वाली महिला बिना ठोस प्रमाण दुष्कर्म का दावा नहीं कर सकती। यह असफल प्रेम संबंधों को आपराधिक मुकदमे में तब्दील करने की बढ़ती प्रवृत्ति न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सिद्धार्थनगर निवासी आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के समय पीड़िता लगभग 20 साल की थी। दोनों के बीच करीब पांच वर्षों से सहमति से प्रेम संबंध थे। संबंध टूटने के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया।