हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव के बिना किसी बीमारी के 13 महीने से स्वरुपरानी नेहरू अस्पताल में टिके रहने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में यह मामला उजागर किया तो शासन से प्रशासन तक में हड़कंप मच गया। पूछताछ शुरू हुई तो पता चला कि तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गुलशन को फिट करार दे चुका है। मार्च में ही इसकी रिपोर्ट प्रतापगढ़ के जेल अधीक्षक, एसपी के साथ डीएम इलाहाबाद और अस्पताल प्रशासन को दे दी थी। अब जेल अफसर और डॉक्टर विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं।
पिछले साल 2016 मार्च में गुलशन यादव को इलाज के लिए एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुलशन ने यूरिन इंफेक्शन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव की शिकायत की थी। गुलशन को उपचार के लिए भेजकर उपकृत करने वाले जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ कागज की खानापूरी करने के लिए हर दो महीने में एसआरएन अस्पताल के अधीक्षक को पत्र भेज उसके स्वास्थ्य की जानकारी मांगते रहे। पिछले साल दिसंबर तक तो अस्पताल के डॉक्टर निरंतर उपचार होने की रिपोर्ट जेल अधीक्षक को भेजते रहे। इस साल 2017 मार्च में जेल अधीक्षक ने मेडिकल बोर्ड गठित कराकर गुलशन यादव के स्वास्थ्य और बीमारी की गहन जांच कराने का अनुरोध सीएमओ इलाहाबाद से किया था।
जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ के पत्र के आधार पर सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने कुछ महीने पहले तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर एसआरएन अस्पताल जांच के लिए भेजा तो वहां बोर्ड में गुलशन का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजी और आर्थो विभाग के दो चिकित्सक भी शामिल हो गए। रिपोर्ट में गुलशन का इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक ही थी। रिपोर्ट में पुराना रोग बरकरार दिखा उपचार जारी रखने की बात कही गई थी। रिपोर्ट देख सीएमओ चौंके तो लेकिन रिपोर्ट जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ को भेज दी। बीते मार्च महीने में एक बार फिर जेल अधीक्षक का पत्र मिलने पर सीएमओ ने तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल बना उन्हें गुलशन का स्वास्थ्य जांचने के लिए एसआरएन अस्पताल भेजा।
सूत्रों का कहना है कि इस बार के बोर्ड ने रिपोर्ट में गुलशन को ठीक बताया। जिसके आधार पर कैदी को डिस्चार्ज करके पुलिस अभिरक्षा में प्रतापगढ़ जेल भेज देना चाहिए था, लेकिन जेल अधीक्षक और अस्पताल के डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की जांच या रिपोर्ट से ही अनभिज्ञता जता रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि सीएमओ कह रहे हैं कि उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट संबंधित विभागों के अधिकारियों को भिजवा दी है, लेकिन जेल अधीक्षक और अस्पताल प्रशासन रिपोर्ट मिलने से इंकार कर रहा है।
प्रतापगढ़ जिले के सहिबापुर जमेठी निवासी पुष्पेंद्र सिंह को गोली मारकर हत्या के प्रयास में कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव 11 सितंबर 2014 से जेल में थे। पिछले वर्ष 2016 में 17 मार्च को एसआरएन अस्पताल के आर्थो विभाग के वार्ड नंबर दो में रीढ़ की हड्डी में खिंचाव और यूरिनल इंफेक्शन के उपचार के लिए लाया गया। वह तब से यहीं पर भर्ती हैं। यहां बिना किसी रोग के उनका टिका रहना प्रशासन के साथ जेल अफसरों की कार्यशैली पर सवालिया निशान है।
प्रतापगढ़ के जेल अधीक्षक के पत्र के आधार पर तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों के पेनल ने संबंधित विचाराधीन कैदी का स्वास्थ्य परीक्षण कराके जांच रिपोर्ट जेल अधीक्षक के साथ एसपी प्रतापगढ़ और डीएम इलाहाबाद को भेज दी है। सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा
‘सीएमओ की ओर से इनके यहां किसी भी तरह की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट नहीं मिली है। फिलहाल डॉक्टर की सलाह पर मरीज का उपचार चल रहा है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट जब भी मिलेगी, उसी रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन निर्णय लेगा।’ डॉ. करुणाकर द्विवेदी, एसआईसी एसआरएन
अस्पताल में रसूख और पैसे के बल पर अस्पताल में करते हैं मौज
राजनीतिक रसूख या फिर पैसा है तो आप (एसआरएन) अस्पताल में लंबे समय तक उपचार के नाम पर भर्ती रह सकते हैं। जिसका उदाहरण कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव हैं। इनको 13 महीने हो गए, मेडिकल बोर्ड ने फिट बता दिया लेकिन अस्पताल प्रशासन डिसचार्ज करने का नाम ही नहीं ले रहा है। यहां के चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन के सामने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट भी महत्व नहीं रखती है।