जिसे तय करने का कोर्ट ने निर्देश दिया तो जिलाधिकारी ने यह कहते हुए मांग अस्वीकार कर दी कि याची के साथ कोई भी उससे जूनियर कर्मचारी नियमित नहीं किया गया। याची को नियमित करते समय उसकी आयु 45 वर्ष की थी। सरकार से आयु में छूट के बाद उसे नियमित किया गया और वह 31 अक्तूबर 18 को सेवानिवृत्त हो चुका है। उसकी सेवा दस साल से कम है। इसलिए उसे पेंशन पाने का अधिकार नहीं है।
कहा गया कि सरकार नियमित करने में कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकती। जूनियर से पहले उसे नियमित किया जाना चाहिए था। इसलिए उससे जूनियर जिस तारीख को नियमित किए गए हैं उसी तारीख से याची को भी नियमित माना जाए।
कोर्ट ने कहा याची को नियमित न कर जूनियर को नियमित करने की अपनी गलती का लाभ सरकार नहीं उठा सकती। कोर्ट ने याची के नियमितीकरण आदेश को संशोधित कर जूनियर कर्मचारियों को नियमित करने की तिथि से नियमित मानकर सेवा जनित सभी परिलाभों का याची को हकदार माना है।