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High Court: मूल मुकदमे में बरी होने के बाद गैंगस्टर की कार्यवाही अप्रासंगिक, कोर्ट ने रद्द की आपराधिक कार्रवाई

Sun, 13 Jul 2025 05:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मूल मुकदमे में बरी होने के बाद गैंगस्टर की कार्यवाही अप्रासंगिक है। इस तरह के मामले जारी रखने से समय और पैसे की बर्बादी होती है। लिहाजा, अदालत ऐसे मुकदमों को जारी रखने की इजाजत नहीं दे सकती।

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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मूल मुकदमे में बरी होने के बाद गैंगस्टर की कार्यवाही अप्रासंगिक है। इस तरह के मामले जारी रखने से समय और पैसे की बर्बादी होती है। लिहाजा, अदालत ऐसे मुकदमों को जारी रखने की इजाजत नहीं दे सकती।

यह टिप्पणी कर न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की अदालत ने संभल के जौहर अली और छह अन्य लोगों के खिलाफ चल रही गैंगस्टर एक्ट की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। मामला संभल के नखास थाना क्षेत्र का है। 2019 में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर याचियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्यवाही शुरू की गई थी। इस मुकदमे में अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत से आरोपी बरी हो गए। इसके बावजूद सभी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा है। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए याचियों के खिलाफ लंबित गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को उस आपराधिक मामले में बरी कर दिया जाता है, जिसके आधार पर उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है तो कार्यवाही भी जारी नहीं रखी जा सकती। संवाद

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