जिला न्यायालय ने सोमवार को खीरी थानाक्षेत्र के अंतर्गत 14 वर्ष पुराने मामले में अपहरण एवं दुष्कर्म के चार अभियुक्तों योगेश पटेल, शिवमंदिर पटेल, लल्लन यादव एवं कौशल्या देवी को सात वर्ष के सश्रम कारावास एवं 13 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक निशा झा ने अभियुक्तों के वकील और सहायक शासकीय अधिवक्ता मृत्युंजय त्रिपाठी के तर्कों को सुनकर दिया।
पीड़िता के पिता ने 16 मार्च 2006 को अभियुक्तों के विरुद्ध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि बृजेश मंडल के साथ मिलकर चारों अभियुक्त उसकी 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गए। विवेचना के दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पीड़िता को बृजेश मंडल के पास से बरामद किया। पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि सभी आरोपी मिलकर बेटी की मर्जी की विरुद्ध उसे कटनी ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया।
अभियुक्तों के वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि उक्त अभियुक्त वृद्ध, गरीब एवं असहाय हैं। इन्हें कम से कम सजा देना उचित होगा। जबकि, अभियोजन पक्ष ने विरोध में तर्क दिया कि उक्त सभी अभियुक्त षड्यंत्र करके पीड़िता को भगा ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इन्हें अधिकतम सजा दिया जाना न्यायहित में होगा।
उक्त अभियुक्तों को दोषी साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। 28 जून 2022 को अभियुक्त बृजेश मंडल की मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामले के तथ्यों एवं अपराध की गंभीर प्रकृति को देखकर अदालत ने चार अभियुक्तों को सात वर्ष के सश्रम कारावास एवं 13 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी।