सावन का पहला सोमवार पांच महायोगों से मिलकर भोले भक्तों के लिए मंगल और समृद्धि का प्रतीक बनकर आएगा। प्रथम सोमवार पर इस बार सुख-समृद्धि के सुखद संयोग हैं। पहला सोमवार श्रवण नक्षत्र के साथ प्रीतियोग योग में लग रहा है। यह नक्षत्र पर सौभाग्य और मंगलमय बेला में आरंभ होगा। इसके अलावा आयुष्मान योग, राज योग, शश योग और सर्वार्थ सिद्धि योगों का भी इस दिन मिलन होगा । ज्योतिषीय गणना के अनुसार श्रवण नक्षत्र और प्रीति योग में भगवान शिव के जलाभिषेक से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
भगवान शिव के प्रिय मास सावन के प्रथम जलाभिषेक की तैयारियां रविवार को पूरी कर ली गईं। यमुना तट स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर में पुरुष और महिला भक्तों के दर्शन के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग कराई गई। साथ ही अफसरों ने तैयारियों का जायजा भी लिया। मनकामेश्वर में सोमवार की भोर चार बजे मंगला आरती के साथ ही आम भक्तों के लिए पट खोल दिए जाएंगे।
दिन के 11:45 बजे भोग आरती होगी। इस दौरान सिर्फ 15 मिनट के लिए गर्भगृह में दर्शन रोका जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 से रात 12 बजे तक श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक कर सकेंगे। रात 10 बजे आरती होगी। महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि प्रथम सोमवार को मनकामेश्वर महादेव का रजत शृंगार होगा। इसमें चांदी के मुखौटे, नाग के अलावा मोगरा, गुलाब, रजनीगंधा, बेला के फूलों से बाबा की झांकी सजाई जाएगी। इससे पहले मंदिर को भव्य सजा दिया गया है। इसी तरह अरैल स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग कराई गई है।
पुजारी सोनू पुरी ने बताया कि सोमवार की रात 10 बजे सोमेश्वर महादेव की शृंगार झांकी सजाई जाएगी। भोर में पांच बजे से ही दर्शन-पूजन आरंभ हो जाएगा। बालसन चौराहा स्थित भरद्वाजेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के जलाभिषेक की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। वहां भी सुबह छह बजे से जलाभिषेक आरंभ होगा। सावन सोमवार के मद्देनदर तक्षक तीर्थ और दारागंज स्थित नागवासुकि में भी जलाभिषेक और दर्शन-पूजन की तैयारियां पूरी कर ली गईं। इन मंदिरों में भी भोर से ही भक्तों की भीड़ लग जाएगी।