प्रयागराज। गेहूं खरीद के लिए मानक में छूट मिलने की उम्मीद है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने प्रमुख सचिव और आयुक्त खाद्य एवं रसद को इसके लिए पत्र लिखा है। उन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद सुनिश्चित करने के लिए सिकुडऩ एवं टूटन की छूट की मात्रा छह से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किए जाने की मांग की है। नियमानुसार गेहूं में सिकुडऩ और टूटन की मात्रा छह फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए लेकिन इस बार गेहूं की पैदावार काफी पतली और कमजोर हुई है। बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टिï से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। जो फसल हुई है उसमें भी मानक के अनुरूप दाने नहीं हैं। इससे गेहूं खरीद पर ही सवाल खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को अमर उजाला के बृहस्पतिवार के अंक प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद ११ किसानों के गेहूं के नमूनों की जांच कराई गई। इनमें से नौ नमूने फेल पाए गए। सभी सिकुडऩ और टूटन की मात्रा छह प्रतिशत से काफी अधिक रही। एक नमून में तो यह मात्रा १६ फीसदी से भी अधिक पाई गई। इस रिपोर्ट को लगाते हुए एसडीएम करछना आकांक्षा राणा ने डीएम को पत्र लिखकर नियमों में शिथिलता की मांग की थी। इसी क्रम में अब डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने शनिवार को आयुक्त खाद्य तथा रसद विभाग को पत्र लिखकर मानक को शिथिल किए जाने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि ओलावृष्टिï की वजह से गेहूं की फसल में सिकुडऩ की समस्या आ रही है। जांच में भी यह सीमा ११ से १२ प्रतिशत तक पाई जा रही है। इसलिए सिकुडऩ एवं टूटन में छूट की सीमा बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया जाए। ताकि, कृषकों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाया जा सके। इसकी प्रति प्रमुख सचिव को भी भेजी गई है। अफसरों का कहना है कि इस आशय का पत्र कई अन्य जिलों की ओर से भी शासन को लिखा गया है। ऐसे में किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।