इलाहबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय अध्यापक संघ (ऑक्टा) ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम बदले जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए पहले स्थायी कुलपति की नियुक्ति की मांग की है। शिक्षक संगठनों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआडी) से मांग की है कि इविवि का नाम बदले जाने से ज्यादा जरूरी विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति को नियुक्ति किया जाना है।
ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे और ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि इविवि का नाम बदले जाने से कोई फायदा नहीं, लेकिन कुलपति की नियुक्ति होती है तो तमाम बड़े नीतिगत निर्णय लेने के रास्ते खुल जाएंगे और विश्वविद्यालय की गुणत्ता में सुधार के लिए कई जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे। उनका कहना है कि जब लॉक डाउन के दौरान इविवि के नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर कार्य परिषद के सदस्यों से ऑनलाइन राय-मशविरा किया जा सकता है तो स्थायी कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के सदस्यों का नाम फाइनल करने के लिए कार्य परिषद की ऑनलाइन बैठक क्यों नहीं की जा सकती।
इविवि ने पिछले दिनों कार्य परिषद की बैठक में सर्च कमेटी के लिए दो नाम फाइनल किए थे, लेकिन मंत्रालय की ओर से इनमें से एक नाम पर आपत्ति आ गई थी और निर्देश दिए गए थे कि सर्च कमेटी के लिए दूसरे सदस्यों के नाम तय किए जाएं। इसके लिए अलग से कार्य परिषद की बैठक करने को भी कहा गया था लेकिन कोविड-१९ के मद्देनजर लॉक डाउन घोषित हो जाने के कारण कार्य परिषद की मार्च में प्रस्तावित बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी।
ऑटा अध्यक्ष एवं ऑक्टा महासचिव का कहना है कि स्थायी कुलपति की नियुक्ति के बाद ही इविवि में शिक्षक भर्ती के रास्ते खुलेंगे। यह हास्यास्पद है कि मंत्रालय कुलपति की नियुक्ति से ज्यादा इविवि का नाम बदलने पर ध्यान दे रहा है जबकि विश्वविद्यालय के नाम से छेड़छाड़ करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है।