भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की तरफ से सोमवार को ‘समसामयिक अनुप्रयोग के लिए उपग्रह छवि विश्लेषण’ विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। पहले दिन मुख्य अतिथि प्रो. शेखर वर्मा ने विद्युत चुम्बकीय तरंगों के महत्व के बारे में बताया। कहा कि अत्याधुनिक तकनीक की सहायता से पृथ्वी की सतह का सटीक मापन किया जा सकता है। वर्तमान में मशीन लर्निंग व डीप लर्निंग तकनीक के प्रयोग से सही व सटीक परिणाम मिल रहे हैं।
प्रो. पवन चक्रवर्ती ने रिमोट सेंसिंग एवं स्पेस इमेजिंग के बारे में बताया। वहीं, प्रो. केपी सिंह ने बारिश के पूर्वानुमान का उदाहरण देते हुए बताया कि सैटेलाइट इमेजिंग से वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। कार्यशाला में डॉ. त्रिलोकी पंत ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि उपग्रह इमेजिंग की मदद से एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र की निगरानी की जा सकती है। कहा, भारत में उपग्रह मिशनों का एक विशाल इतिहास है, जो अतीत में सफलतापूर्वक संचालित किए गए और हर साल अधिक संख्या में उपग्रहों के साथ जारी है।