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Doctor Death Case: आरोपी डॉ. सचिन व डॉ. शुभम से मांगा गया लिखित बयान

Thu, 03 Oct 2024 12:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आर्थोपेडिक के विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने आरोपी चिकित्सक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन यादव और जेआर-3 डॉ. शिवम गुप्ता से लिखित बयान मांगा है। डॉ. डीसी श्रीवास्तव का कहना है कि उनके विभाग में कोई विवाद इतना बड़ा नहीं होता कि जिसमें हत्या जैसी घटना हो। कभी-कभार हल्की कहासुनी होती है।
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डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हड्डी रोग विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की मौत की गुत्थी उलझी हुई है। पुलिस जांच में जुटी है। वहीं, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

आर्थोपेडिक के विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने आरोपी चिकित्सक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन यादव और जेआर-3 डॉ. शिवम गुप्ता से लिखित बयान मांगा है। डॉ. डीसी श्रीवास्तव का कहना है कि उनके विभाग में कोई विवाद इतना बड़ा नहीं होता कि जिसमें हत्या जैसी घटना हो। कभी-कभार हल्की कहासुनी होती है।

डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि करीब दस दिन पहले डॉ. शिवम गुप्ता और डॉ. कार्तिकेय में एक मरीज के इलाज को लेकर थोड़ी नोकझोंक हुई थी। मगर थोड़ी देर बाद दोनों आपस में हंसी-मजाक करते मिले।

खुश मिजाज व मेहनती थे

विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. कार्तिकेय काफी खुश मिजाज और मेहनती थे। अधिकतर मेरे साथ ही रहते थे, और कई बार मुझे छोड़ने घर तक आते थे। छुट्टी पर जाने से पहले डॉ. कार्तिकेय से पूछा था, सब ठीक है, तो उन्होंने कहा था कि हां, सब ठीक है।

 

एक से डेढ़ एमएल नियोविक की डोज में इंसान हो जाता है अचेत

डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि मात्र एक से डेढ़ एमएल नियोविक की डोज लगाने पर इंसान अचेत हो जाता है। अमूमन वेंटीलेटर पर लाने के बाद ही यह लगाया जाता है। डॉ. कार्तिकेय के पास 10-10 एमएल की दो वायल मिली थी। अगर उन्होंने यह लिया है, या दी गई है दोनों स्थितियों में यह बेहद खतरनाक है।

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