इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा की वीजा और नागरिकता विस्तार के किसी दावे पर फैसले के लिए जिलाधिकारी की नकारात्मक आख्या बाधक नहीं है। विदेश मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारी मामले के गुणदोष के आधार पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। उन्हीं का फैसला मान्य भी होगा।
ब्राजीलियाई महिला एलिजाबेथ काहिल की ओर से दाखिल याचिका निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति शिव शंकर प्रसाद की खंडपीठ ने विदेश मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारी को याची के वीजा और नागरिकता विस्तार के आवेदन पर गुणदोष के आधार पर दो महीने में फैसला लेने का आदेश दिया है। तब तक याची महिला के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही करने पर रोक भी लगाई है।
मामला ब्राजीलियाई महिला एलिजाबेथ काहिल का है। एलिजाबेथ दस साल पहले रोजगार वीजा पर भारत आई थी। विदेशी क्षेत्रीय रजिस्ट्रेशन अधिकारी ने जिलाधिकारी प्रयागराज की आख्या पर उसे नोटिस जारी कर तत्काल भारत से अपने देश वापस लौटने का निर्देश दिया था। याची ने विदेशी क्षेत्रीय रजिस्ट्रेशन अधिकारी लखनऊ द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में याची ने वीजा और नागरिकता विस्तार की मांग की थी।
सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि जिलाधिकारी प्रयागराज की रिपोर्ट के मुताबिक याची को वीजा 10 साल के लिए दिया गया था, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में याची भारत में प्रवास नहीं कर सकती।
जबकि याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने रोजगार वीजा और नागरिकता विस्तार के लिए आवेदन किया था। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक याची के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद भी वीजा और नागरिकता विस्तार का आवेदन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित है। जिस पर उसे ही निर्णय लेने का अधिकार है।
कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि वीजा और नागरिकता विस्तार के जुड़े मामले में जिलाधिकारी की नकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। ऐसे मामलों का निस्तारण संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी द्वारा मामले के गुणदोष के आधार पर दिए गए निर्णय के आधार पर ही होगा। जिलाधिकारी की नकारात्मक आख्या (रिपोर्ट) सक्षम प्राधिकारी के निर्णय लेने के अधिकार को प्रभावित नही कर सकती।
कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को याची के वीजा और नागरिकता विस्तार के आवेदन पर दो माह में गुणदोष के आधार पर निर्णय लेने का आदेश देते हुए याची के विरुद्ध किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक भी लगा दी।
ओम प्रकाश सिंह यादव।