इलाहाबाद हाईकोर्ट से विजन टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से आवंटित भूखंड का कब्जा प्रमाणपत्र जब तक जारी नहीं किया जाता है, तब तक लीज रेंट वसूला नहीं जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने लगभग 168 करोड़ रुपये लीज रेंट की मांग रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने दिया है।
यह मामला नोएडा के सेक्टर 94 में स्थित एक वाणिज्यिक भूखंड से संबंधित है। मूल रूप से यह भूखंड मेसर्स बीपीटीपी इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर लिमिटेड को आवंटित किया गया था। बाद में उप-विभाजित कर प्लॉट संख्या 2ए याची कंपनी को हस्तांतरित किया गया था। नोएडा प्राधिकरण ने लगभग 168 करोड़ रुपये लीज रेंट लगाया, जिसे याची विजन टाउन प्लानर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नोएडा प्राधिकरण ने 16 फरवरी 2010 को भूखंड के उप-विभाजन की अनुमति दी। ऐसे में नियमानुसार दोनों भूखंडों के लिए पृथक साइट प्लान, उप-पट्टा विलेख और कब्जा प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य था। कोर्ट ने पाया कि प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्र कब्जा प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था। कोर्ट ने दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं सौंपा जाता, तब तक लीज रेंट की मांग करना अन्यायपूर्ण है। कोर्ट ने लगभग 168 करोड़ रुपये के लीज रेंट की मांग को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सीआईसी शुल्क की वसूली को भी अवैध ठहराते हुए पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया है।