इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ फर्जी डिग्री मामले में 318 दिन देरी से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका और देरी माफी की अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की अदालत ने आरटीआई कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा, न अर्जी में लगाए आरोप गंभीर हैं, न ही याची।
याची दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर फर्जी डिग्री के आधार पर पेट्रोल पंप की डीलरशिप हासिल करने और 2007 विधानसभा एवं अलग-अलग चुनाव के नामांकन के समय गलत हलफनामा दाखिल करने के आरोपों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। चुनावी हलफनामे में हिंदी साहित्य सम्मेलन से जारी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का उल्लेख किया गया था। दावा था कि ये राज्य सरकार अथवा किसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
इस अर्जी को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नम्रता सिंह ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची ने 318 दिन की देरी से पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। देरी माफी की अर्जी भी दी। इस पर डिप्टी सीएम को भी नोटिस जारी किया गया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि याची ने जानबूझकर देरी नहीं की है। वह वास्तव में बीमार था। लेकिन, कोर्ट ने याची की इस दलील को सिरे से नकार दिया और पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।