चार साल पहले गिरफ्तार पश्चिम बंगाल निवासी जाली नोटों का सौदागर सुभाष मंडल फर्जी जमानतदार पेश करके जेल से रिहा हो गया। कोर्ट में गैरहाजिर रहने के बाद वारंट जारी होने और जमानतदारों की तलाश से इसका खुलासा हुआ। जिनके नाम से जमानत ली गई थी, वे लोग भी कोर्ट में हाजिर हो गए। कोर्ट ने आरोपी, उसके पैरोकार, दो फर्जी जमानतदार और उनका सत्यापन करने वाले अधिवक्ता (कुल पांच लोगों) के विरुद्ध कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम प्रताप सिंह राणा की कोर्ट का है। सुभाष के पेशी पर नहीं आने पर उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया। जमानतगीर तलब किए गए। इनसे पता लगा कि नोटों का सौदागर जालसाजी करके फरार हो चुका है। कोर्ट ने सुभाष मंडल, उसके पैरोकार देवाशीष मंडल, फर्जी नाम से जमानत देने वाले दो अज्ञात व्यक्तियों और उनके अधिवक्ता वीके राय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि पश्चिम बंगाल के जिला मालदा के वैष्णव नगर स्थित जयपुर निवासी सुभाष मंडल की जमानत हाईकोर्ट से हुई थी। पैरोकार देवाशीष मंडल ने अधिवक्ता वीके राय के जरिये कोर्ट में अर्जी प्रस्तुत की। समर बहादुर व विजय बहादुर निवासी गांव शंकरजी के मंदिर के पास, पूरा मंसूराबाद, प्रयागराज को जमानतदार के रूप में प्रस्तुत किया गया। जांच में पता लगा कि समर बहादुर और विजय बहादुर ने जमानत नहीं दी। कर्नलगंज पुलिस ने मामले की विवेचना उप निरीक्षक राजेंद्र कुमार को सौंपी है।