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करीबी की मदद से दिलीप के कातिल तक पहुंची क्राइम ब्रांच

Thu, 15 Feb 2018 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दलित छात्र दिलीप कुमार सरोज के हत्या के फरार आरोपी विजय शंकर सिंह तक क्राइम ब्रांच रिश्तेदारों और उसके करीबियों की मदद से पहुंच सकी। विधान परिषद और विधान सभा में इस मामले को लेकर हंगामे के बाद पुलिस इस मामले में विफलता को लेकर घिरने लगी थी। तब यह भी चर्चा थी कि पुलिस के एक बड़े अधिकारी की पनाह के चलते उसे पकड़ने में दिक्कतें आ रही हैं लेकिन चौतरफा दबाव के बाद पुलिस ने हर हथकंडे अपनाए। अंतत: क्राइम ब्रांच ने करीबियों की मदद से उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
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छात्र दिलीप कुमार सरोज की हत्या के बाद फरार मुख्य आरोपी टीटीई विजय शंकर सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर छात्रों के उग्र प्रदर्शन से संगमनगरी सुलग उठी थी। 12 फरवरी को एसएसपी का आंदोलित छात्रों ने घेराव किया तब उन्होंने भरोसा दिलाया था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी टीटीई को गिरफ्तार कर सीखचों के पीछे डाल दिया जाएगा लेकिन पुलिस के हाथ खाली ही रहे। इस बीच दलित छात्र के मुद्दे पर सूबे की सियासत गरमा गई। एसएसपी आकाश कुलहरि ने बुधवार को पुलिस लाइन में मीडिया के सामने स्वीकार किया कि कुछ स्तरों पर ढिलाई हुई, वरना उसे पकड़ लिया गया होता। इसकी गिरफ्तारी के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं। एसएसपी ने बताया उसके करीबियों के अलावा एक रिश्तेदार की मदद से क्राइम ब्रांच उस तक पहुंची और उसे सुल्तानपुर से उठा लिया गया।  

दिलीप सरोज के मुख्य हत्यारोपी टीटीई को बड़े पुलिस की अफसर की पनाह मिलने की चर्चाओं पर बुधवार को एसएसपी आकाश कुलहरि को सफाई देनी पड़ी। पुलिस लाइन सभागार में इस घटना के खुलासा के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या हत्यारोपी को पुलिस के किसी अधिकारी और जनप्रतिनिधि का संरक्षण प्राप्त था? तब एसएसपी का कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है। इस घटना के बाद आरोपी टीटीई से पुलिस अफसर और जनप्रतिनिधियों से ताल्लुक की पुष्टि नहीं हुई है। 
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छात्र दिलीप कुमार सरोज हत्याकांड का मुख्य आरोपी टीटीई विजयशंकर सिंह दिलीप की मौत के बाद शहर से बाहर जाने पर वह कहीं भी ठहरकर नहीं रहा। वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। तीन दिन के भीतर उसने सैकड़ों किलोमीटर का सफर भी तय किया। इस दौरान वह अपने पैतृक गांव सुल्तानपुर के अलावा फैजाबाद, लखनऊ और फिर दिल्ली भी पहुंचा।

छात्र दिलीप की इलाज के दौरान 11 फरवरी की सुबह अस्पताल में मौत हुई। खबर मिलने के बाद टीटीई विजयशंकर सिंह अपने ड्राइवर रामदीन को लेकर सीधे सुल्तानपुर पहुंचा। पुलिस सूत्रों की मानें तो विजयशंकर जानता था कि एक जगह ठहरकर रहने पर पुलिस उस तक आसानी से पहुंच जाएगी। यही वजह थी कि वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। सुल्तानपुर में बिना कुछ बताए उसने ड्राइवर रामदीन को छोड़ दिया। इसके बाद फैजाबाद पहुंच गया। सूत्रों की मानेें तो फैजाबाद में वह अपने एक परिचित बैंककर्मी के घर कुछ देर के लिए रुका। यहां उसने अपना मोबाइल फोन भी उसे दे दिया। इसी दौरान सोमवार को उसकी तलाश में लगी टीम को उसकी लोकेशन फैजाबाद मिली। पुलिस टीमें वहां पहुंची तो पता चला कि कुछ घंटे पहले ही विजयशंकर वहां से निकल गया। सूत्रों की मानें तो फैजाबाद से निकलकर विजयशंकर सिंह सोमवार रात में ही लखनऊ पहुंचा। इसके बाद उसने दिल्ली की राह पकड़ी। इसके बाद दिल्ली से लौटकर वह फिर लखनऊ और वहां से सुल्तानपुर पहुंचा। बुधवार भोर में वह यहां से भी भागने की फिराक में था, तभी क्राइम ब्रांच ने उसे बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया।
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