लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास में देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद एडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने अपना मकान आवासीय प्रयोग के लिए दिया था, न कि गेस्टहाउस के लिए। अक्तूबर 2013 में मकान किराए पर देने के पहले रेंट एग्रीमेंट के तहत एग्रीमेंट भी कराया था। उन्होंने किराएदार से स्टांप पेपर हुए एग्रीमेंट की प्रति भी दिखाई, जिससे पुष्टि हुई कि उन्होंने मकान आवासीय उपयोग के लिए ही दिया था।
उपाध्यक्ष सिंह ने मकान को किराए पर उठाने का कारण भी स्पष्ट किया। कहा कि उनकी तैनाती लखनऊ से बाहर रही है, सो खाली मकान को आवासीय प्रयोग के लिए किराए पर दिया, ताकि उसकी देखभाल भी होती रहे। लगातार लखनऊ के बाहर रहने के कारण किराएदार द्वारा मकान में अनुचित उपयोग से वह पूरी तरह अनभिज्ञ थे। बताया कि घटना के वक्त आवास न तो उनके कब्जे में था न ही उनके परिवार का कोई सदस्य वहां था। घटना की जानकारी होने के बाद एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण किराएदार को मकान खाली करने का नोटिस दे दिया है। घटना की एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। इस घटना से उनका कोई लेना देना नहीं है।
दो दिन पहले इलाहाबाद में अलकापुरी कॉलोनी स्थित उनके सरकारी आवास के बाहर दो दिन पहले हुए प्रदर्शन के बारे में कहा कि प्रदर्शन करने वाले वही तथाकथित छात्रों का समूह था, जिन्होंने पिछले दिनों एडीए कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों से बदसलूकी और तोड़फोड़ की थी। उनके खिलाफ एडीए ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी और वह छात्र जेल भी गए थे।