झूंसी के संगम विहार हवेलिया इलाके में बृहस्पतिवार शाम क्राइम ब्रांच और झूंसी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली नोट के तीन सौदागरों को दबोच लिया गया। इनके पास से भारी मात्रा में नकली नोट और उसे बनाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। पकड़े गए धंधेबाज किराए के मकान से अवैध कारोबार का संचालन कर रहे थे। शुक्रवार को दोपहर बाद पुलिस ने पकड़े गए नकली नोट के धंधेबाजों को जेल भेज दिया।
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि झूंसी के संगम विहार कालोनी में नकली नोट के कारोबारियों ने अपना ठिकाना बनाया हुआ है। बृहस्पतिवार शाम झूंसी पुलिस की मदद से क्राइम ब्रांच ने संगम विहार कालोनी में छापेमारी कर सार्थक शुक्ल पुत्र राजेश शुक्ल निवासी मेजा खास थाना मेजा, रोहित मिश्र पुत्र कृपाशंकर मिश्र थाना मऊआइमा तथा नागेश्वर दयाल पुत्र दीनदयाल भारती निवासी हवेलिया उल्टा किला पुरानी झूंसी को दबोच लिया। सार्थक के पास से दो हजार रुपये के दो नोट, 500 के तीन, 50 के 36 नोट तथा सौ के 15 नकली नोट बरामद किए गए। रोहित के पास से 500 के 32, 50 के दस नोट और सौ रुपये के 15 नोट बरामद किए गए।
नागेश्वर दयाल के पास से सौ रुपये के 25 नोट तथा पचास रुपये के दस नोट बरामद किए गए। तीनों के पास से कुल 47950 रुपये के नकली नोट बरामद किए गए। इसमें सौ तथा पचास के छह-छह असली नोट भी हैं। असली नोटों के नंबर की सीरीज से ही नकली नोट छापे जाते थे। पूछताछ में पकड़े गए धंधेबाजों ने बताया कि तीनों किराए के इस मकान से काफी दिनों से नकली नोट छापकर आसपास के अलावा बाहर के शहरों में खपाते थे। किराए के मकान से एक प्रिंटर, डाई, स्कैनर, थर्माकोल, हरे कलर का टेप व अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पकड़े गए कारोबारियों को शुक्रवार को दोपहर बाद जेल भेज दिया गया।
नकली नोट के अवैध धंधे से जुड़े धंधेबाजों का मास्टर माइंड हाईस्कूल फेल सार्थक शुक्ल है। एसएसआई अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सार्थक ने ही हवेलिया के संगम विहार कालोनी में किराए पर मकान ले रखा था। इसके बाद इस कारोबार में रोहित और नागेश्वर दयाल की इंट्री हुई। रोहित बीकाम कर रहा है, जबकि नागेश्वर एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है। तीनों देर रात से नकली नोटों की छपाई में जुटते थे। भोर होने से पहले नकली नोट को छापकर उसे खपाने की तैयारी की जाती थी। अब तक लाखों रुपये छापकर बाजार में खपाया जा चुका है।
सौ, पांच सौ और दो हजार के ऐसे नकली नोट कि असली नोट भी उसके आगे अपनी असल पहचान खो रहे थे। असली और नकली नोटों में इतना मामूली अंतर कि आम आदमी तो उसे पकड़ भी नहीं सकता है। नकली नोटों को असली बनाने के लिए असली नोटों के नंबरों की सिरीज भी उस पर छापी जाती थी। नकली नोट के भीतर हरे रंग का टेप भी लगाया जाता था।