क्राइम ब्रांच और फूलपुर पुलिस ने शनिवार सुबह एक घर में छापेमारी नकली नोट के कारोबार में लिप्त पिता-पुत्र समेत आठ बदमाशों को दबोच लिया। तलाशी में उनके कब्जे से असलहे, सफारी, नकली नोट की खेप बरामद हुई है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि वे नकली नोट बाहर से लाते हैं या खुद ही छापते हैं। आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस गिरोह में शामिल अन्य बदमाशों की तलाश में जुटी है। आमतौर यह धंधा करने वाले बदमाश बड़ी नोट छापते हैं लेकिन पकड़े युवकों के पास पांच, दस, बीस के नकली नोट बरामद हुए। जो असली नोटों के बीच नकली नोट चलाते थे। पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य बदमाशों की तलाश में लगी है।
मुखबिर की सूचना पर शनिवार सुबह लगभग सात बजे क्र ाइम ब्रांच प्रभारी नागेश सिंह, स्वॉट टीम प्रभारी ओम शंकर शुक्ला, सर्विलांस प्रभारी ब्रजेश सिंह, इंस्पेक्टर फूलपुर पुष्कर प्रताप सिंह, एसआई आरसी निखिल ने फूलपुर में खोजापुर गांव के जितेंद्र शुक्ला के घर में छापा मारा। छापेमारी से इलाके में खलबली मच गई। अंदर मौजूद तस्कर बाहर पुलिस देखकर चहारदीवारी फांदकर भागने लगे। गिरोह का सरगना सुभाष पांडेय उर्फ पंकज, सोनू निवासी नड़ार मुंगराबादशाहपुर जौनपुर, जितेंद्र शुक्ल निवासी खोजापुर, उसके भाई दिनेश शुक्ला, नागेंद्र सिंह निवासी जनुआं जौनपुर, सोनू मिश्र उर्फ संतोष जौनपुर, प्रभाकांत शुक्ल, अमित शुक्ल निवासी फूलपर को दबोच लिया।
तलाशी में उनके कब्जे से 18 हजार 816 रुपये के जाली नोट, रायफल, दोनाली बंदूक और पिस्टल, सफारी बरामद किया है। इसके अलावा शातिरों के पास से नोट छापने का कागज भी मिला है। इससे शक है कि शातिर खुद ही नोट छापते हैं। पुलिस इसकी जांच में जुटी है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बड़े नोट के बजाय छोटे नोट दस, पांच, बीस और सौ रुपये के नकली नोट छापते है। जिन्हें असली नोटों के बीच छिपाकर चलाया जाता है। वे कई सालों से यह धंधा कर रहे थे।
नकली नोट छापने वाले इस गिरोह में एक ही परिवार के चार सदस्य हैं। जिसमें पिता-पुत्र और सगे भाई शामिल है। जितेंद्र शुक्ला और दिनेश शुक्ल सगे भाई हैं। दिनेश के ट्रैक्टर एजेंसी और मेडिकल स्टोर भी है। इसके अलावा प्रभाकांत, अमित भी उसके परिवार के ही हैं।
आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि वे कई सालों से यह काला धंधा कर रहे थे। आसपास के जनपदों में भी गिरोह के सदस्यों के माध्यम से नकली सप्लाई की जाती थी। गिरोह का सरगना जौनपरु का सुभाष पांडेय है। पुलिस जांच में जुटी है कि नकली नोट छापने का कारखाना कहां चलता है।