सोरांव में चार लोगों की हत्या के मामले में भले ही पांच लोग नामजद किए गए हों लेकिन पुलिस अन्य बिंदुओं पर भी जांच में जुटी है। पुलिस लूटपाट के लिए हत्या के एंगल को भी ध्यान में रखे हुए है। इसी के तहत शनिवार को गंगापार क्षेत्र में सक्रिय ऐसे गिरोहों के पांच शातिर बदमाशों को हिरासत में लिया गया। अफसरों का कहना है कि उनसे पूछताछ की जा रही है।
मौका मुआयना करने वाले अफसरों ने बताया कि जिस घर में चारों शव मिले वहां आलमारी व बक्से का ताला टूटा था। साथ ही घर का सारा सामान भी बिखरा हुआ था। एकबारगी तो अफसरों ने भी यही माना था कि लूटपाट के लिए सामूहिक हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। बाद में पांच लोगों की नामजदगी पर मामला उलट गया। इसके बाद कहा जाने लगा कि हत्यारों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए घटना को लूटपाट के लिए हत्या का रूप देने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपयिों की तलाश की जा रही है। हालांकि लूटपाट के लिए हत्या के बिंदु को अभी सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि इसको भी ध्यान में रखकर पुलिस मामले में आगे बढ़ रही है। दरअसल गंगापार क्षेत्र में पूर्व में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जब लूटपाट की नीयत से घुसे बदमाशों ने हत्याएं की। ऐसे में पुलिस क्षेत्र में सक्रिय ऐसे गिरोह के सदस्यों की कुुंडली भी खंगाल रही है। उधर इसी के तहत शनिवार को पुलिस ने कुछ ऐसे ही गिरोहों के पांच लोगों को हिरासत में ले लिया। उनसे पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच की टीम ने भी पूछताछ की। उनसे जानकारी जुटाई जा रही है कि बिगहिया गांव में हुई वारदात के बाद से उनका कोई साथी या किसी दूसरे गिरोह का कोई सदस्य अचानक गायब तो नहीं हो गया है। इसके अलावा पूर्व में इस तरह की घटनाओं में लिप्त रहे और मौजूदा समय में जेल से बाहर चल रहे बदमाशों का भी पता लगाया जा रहा है कि वह कहां हैं।
गंगापार के ही थरवई के सहजीपुर में बहमलपुर निवासी राजेंद्र व उसके दो साथियों मिथुन पटेल व सुरेंद्र यादव ने लूटपाट की नीयत से दो दोहरे कत्ल की वारदातों को अंजाम दिया था। पहले घटना सहजीपुर गांव में दो जुलाई की रात हुई थी। गांव में तीनों विजय बहादुर के घर चोरी करने गए थे। जहां नाकाम रहने पर उन्होंने विजय बहादुर(55) व उसकी पत्नी ऊषा देवी (45)की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी थी।
लूटपाट की नीयत से ही पहुंचे बदमाशों ने दूसरा दोहरा हत्याकांड 25 जुलाई को हरिरामपुर में अंजाम दिया था। यहां सास-बहू की हत्या की थी। दरअसल राजेंद्र का साथी मिथुन दोनों महिलाओं के घर के बगल में ही रहता था। उसे सूचना मिली थी कि उस घर में करीब 80 लाख रुपये हैं। यह जानकारी मिलते ही तीनों रात में चोरी की नीयत से वहां पहुंच गए। वहां सास गोमती देवी व बहू सोना देवी बरामदे में सोते मिलीं। दरवाजे पर लगा ताला तोड़ते वक्त आवाज सुनकर गोमती जाग गई। इसके बाद तीनों ने चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। उधर सास की चीख सुनकर बहू सोना देवी उठी तो उसे भी मौत की नींद सुला कर बदमाश भाग निकले। हालांकि वहां से उन्हें मात्र 1300 रुपये मिले थे।