अशोक नगर में सेना के रिटायर्ड अफसर वीके मित्तल के घर नौकर विमलेश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई तो उसका ममेरा भाई और दूसरा नौकर दिलीप गायब हो गया। दोनों के मां-पिता ने पुलिस पर ही दिलीप को गायब करने का आरोप लगा दिया और कलेक्ट्रेट में अनशन शुरू कर दिया। दिलीप तो मिला नहीं लेकिन पुलिस ने अनशन कर रहे तीन लोगों को जबरन उठाकर बेली अस्पताल में भर्ती करा दिया। एएसपी सचिंद्र पटेल अनशनकारियों को कलेक्ट्रेट से लेकर अस्पताल पहुंचे। पुलिस का कहना है कि डॉक्टरों ने रविवार को अनशनकारियों का मेडिकल किया था। हालत गंभीर होने पर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कलेक्ट्रेट में अनशन पर विमलेश के पिता कौंधियारा के निब्बू लाल, दिलीप की मां उवासा तथा उन्हीं के गांव के कृष्ण कुमार आठ अप्रैल से बैठे थे। निब्बू लाल, दिलीप की मां उवास के सगे भाई हैं। विमलेश और दिलीप रिटायर्ड सैन्य अफसर के घर नौकर थे। विमलेश की 10 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उसका 11 मार्च को पोस्टमार्टम हुआ था। मौत की वजह स्पष्ट न होने के कारण बिसरा प्रिजर्व कर लिया गया था। घर वालों को यह कहकर शहर बुलाया गया था कि उनके बेटे की हालत खराब है। आरोप है कि कैंट थाने की पुलिस पोस्टमार्टम के बाद दिलीप को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। तब से वह गायब है।
पहले पुलिस ने कहा था कि पूछताछ के बाद उसको छोड़ दिया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दो दिन बाद जब परिजन पहुंचे तो कहा गया कि दिलीप के बारे में उनको कुछ पता नहीं। घर वालों ने डीएम से शिकायत की तो 18 मार्च को हत्या तथा 21 मार्च को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इसके बाद भी कैंट पुलिस ने दिलीप की बरामदी की कोशिश नहीं की तो विमलेश के पिता और दिलीप की मां अनशन पर बैठ गए। दोनों ने बैनर लगा था जिस पर कैंट पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कृष्ण कुमार का कहना है कि दिलीप घटना का चश्मदीद गवाह है। पुलिस हत्या आरोपी से मिली हुई है। उसको बचाने के लिए ही दिलीप को गायब किया गया। जब तक दिलीप नहीं मिलता, अनशन जारी रहेगा।