इलाहाबाद विश्वविद्यालय में क्लास के भीतर छात्रों को गोली मारे जाने और एएन झा छात्रावास में शोध छात्र के आत्महत्या किए जाने के मामले में छात्रों ने इन दोनों घटनाओं के लिए कुलपति और चीफ प्रॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया है। छात्रों ने शुक्रवार को बांह पर काली पट्टी बांधकर कुलपति दफ्तर का घेराव और प्रदर्शन किया। साथ ही वीसी और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के बैनर तले छात्रों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विश्वविद्यालय परिसर में मौन जुलूस निकाला। इनमें समाजवादी छात्रसभा, सीवाईएसएस, दिशा छात्र संगठन, इंकलाबी छात्र मोर्चा, आइसा, एआईडीएसओ जैसे संगठनों के छात्र शामिल थे। छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव के नेतृत्व में सभी जुलूस की शक्ल में सीधे कुलपति कार्यालय पहुंचे और वहां प्रदर्शन किया। कुलपति कार्यालय का घेराव करते हुए छात्रों ने ज्ञापन भी सौंपा। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में अराजकता का माहौल है। छात्र-छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं। विश्वविद्यालय में लगातार मारपीट हो रही है। कुछ गार्डों के भरोसे विश्वविद्यालय की सुरक्षा है।
कुलपति ने ऐसे व्यक्ति को प्रॉक्टर बना रखा है, जो ऑटा के अध्यक्ष भी हैं। वह अपने पद की जिम्मेदारी नहीं उठा पा रहे। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। छात्रों ने एक ज्ञापन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी प्रेषित किया है और विश्वविद्यालय में अराजकता एवं अन्य अव्यवस्थाओं के लिए कुलपति से इस्तीफा लेने की मांग की है। घेराव, प्रदर्शन और मौन जुलूस में छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव समेत पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमजा, उपमंत्री भरत सिंह, अखिलेश गुप्ता, राघवेंद्र यादव, अरविंद सरोज, अविनाश विद्यार्थी, अनुज चंद्रा, सुशील भारतीय, शक्ति रजवार, भीम सिंह चंदेल, रामचंद्र, अंगद, शैलेष सद्दाम हुसैन, दिनेश सिंह, पवन गुप्ता आदि शामिल रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों ने शुक्रवार को सपा कार्यालय में बैठक कर इविवि में हुई दो घटनाओं की निंदा की। पूर्व अध्यक्षों ने क्लास में छात्रों को गोली मारे जाने और शोध छात्र की आत्महत्या की घटना को दुखद बताया। इविवि प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि कभी विश्वविद्यालय को आईएएस, आईपीएस समेत बड़े राजनीतिज्ञों को पैदा करने की फैक्ट्री माना जाता था लेकिन अब यहां समस्याएं ही समस्याएं हैं। इनके खिलाफ आवाज उठाने वाले, आंदोलन करने वाले छात्रों को निलंबित और निष्कासित कर छात्र हित की अनदेखी की जाती है। इस वजह से भी विश्वविद्यालय का वातावरण बिगड़ रहा है। बैठक में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव, विनोद चंद्र दुबे, केके राय, हेमंत टुन्नू, अजीत यादव, संजय तिवारी, भूपेंद्र यादव, पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. निर्भय सिंह पटेल आदि मौजूद रहे। उधर, छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि गोल्ड मेडलिस्ट छात्र एसएस पॉल के आत्महत्या करने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम हुए छात्र को अवसाद से ग्रसित बताकर खुद को घटना से अलग कर लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह रवैया गैरजिम्मेदाराना और निराश करने वाला है।