उन्नाव गैंगरेप पीड़िता को अपहरण के बाद अभियुक्तों ने साठ हजार रुपये में बेच दिया था। पीड़िता द्वारा की गई शिकायत की प्रति से उसके साथ हुई बर्बरता की पूरी कहानी उजागर होती है। शिकायत की प्रति हाईकोर्ट को महाधिवक्ता ने उपलब्ध कराई है।
प्रति के मुताबिक 11 जून 2017 की रात उसे पड़ोस के दो युवक अवधेश और शुभम नौकरी दिलाने के नाम पर अपनी कार से ले गए। उससे कार में ही रेप किया गया। उसने भागने की कोशिश की तो अभियुक्तों ने उसे पीटने के बाद बंधक बना लिया। इसके बाद उसे शुभम के घर में बंधक बनाकर रखा गया और कई लोगों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। कोर्ट का कहना है कि जो तथ्य सामने आए हैं, उससे जाहिर है कि अभियुक्तगण विधायक कुलदीप के जानने वाले हैं।
प्रति के मुताबिक पीड़िता को 20 जून 2017 को आगरा में किसी व्यक्ति के हाथों बेच दिया गया, मगर उसी दिन माखी थाने की पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया। वापस आते समय पुलिसकर्मी उसे लगातार धमकाते रहे कि अगर उसे जो बताया गया है, उसके सिवाए कुछ भी कहा तो उसके पिता को मार दिया जाएगा, जैसा कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का आदेश है। पीड़िता का आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी मेडिकल जांच करने के बजाए सलाह दी कि कुलदीप सिंह से अच्छे रिश्ते बनाकर रखे। दिल्ली में उसने अपने चाची को बताया कि कुलदीप सिंह ने चार जून 2017 को उससे दुष्कर्म किया था। अवधेश तिवारी, शुभम और बृजेश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, जबकि कुलदीप के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। तीनों आरोपी बाद में जमानत पर छूट गए।
इसके बाद पीड़िता की चाची उसे कुलदीप सिंह, डॉक्टर, एसएचओ और एसपी के खिलाफ एफआईआर लिखाने के लिए लखनऊ लिवा ले गई । पीड़िता की शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो उसने मुख्यमंत्री से शिकायत की। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद क्षेत्राधिकारी माखी विधायक कुलदीप सिंह की मदद करते रहे। उल्टे पीड़िता और उसके परिवार पर शिकायत नहीं करने का दबाव बनाया गया। 12 फरवरी 2018 को पीड़िता की मां ने सीजेएम की अदालत में 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थनापत्र देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। सीजेएम ने माखी थाने से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद कोर्ट के आदेश का इंतजार किए बिना पुलिस ने 12 अप्रैल 2018 को कुलदीप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
इस दौरान पीड़िता के परिवार पर दबाव डालने के लिए उसके परिवार के लोगों के खिलाफ कई फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। पीड़िता के पिता के खिलाफ आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। उसे विधायक के भाई अतुल सिंह और उसके लोगों ने बर्बरता से पीटने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। नौ अप्रैल को इन चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई।