रेलवे भर्ती बोर्ड की ऑनलाइन परीक्षा के पेपर लीक का सूत्रधार रेलवे का ही एक सेक्शन इंजीनियर विनोद प्रकाश गुप्ता निकला। पेपर लीक से जुड़े लोग इस इंजीनियर के जरिए गोरखधंधा चमकाए हुए थे। इसके बदले उसे लाखों रुपये दिए जाते थे। एसटीएफ ने हाईटेक ढंग से ऑनलाइन परीक्षा का पेपर लीक करने के मामले में इस इंजीनियर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि इतने ही लोग अभी फरार हैं।
एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के डिप्टी एसपी प्रवीण सिंह चौहान को भनक लगी थी कि रेलवे भर्ती बोर्ड की ऑनलाइन परीक्षा में कुछ गड़बड़ी चल रही है। उनके निर्देश पर जांच कर रहे इंस्पेक्टर नवेंदू कुमार सिंह को शुक्रवार दोपहर खबर मिली कि तेलियरगंज में जोंधवल के एक लॉज में रेलवे की ऑनलाइन परीक्षा का पेपर लीक कराकर नकल का खेल चल रहा है।
इंस्पेक्टर ने उपनिरीक्षक अजय कुमार सिंह, अतुल सिंह, केसी राय, श्रीनिवास यादव और सिपाहियों के साथ दोपहर करीब एक बजकर चालीस मिनट पर तीसरी मंजिल के कमरे में छापेमारी की। वहां तीन लैपटॉप के साथ तीन लोग मौजूद थे। उनमें से दो लैपटॉप में रेलवे की ऑनलाइन परीक्षा की दूसरी पाली (12.30 से दो बजे) के पेपर खुले थे। एक लैपटॉप रसूलाबाद स्थित संयोगिता इंस्टीटयूट के कंप्यूटर और दूसरा लैपटॉप चकिया स्थित फर्स्ट स्टेप ई-एजुकेशन के कंप्यूटर से लिंक थे। ये दोनों रेलवे भर्ती बोर्ड की ऑनलाइन परीक्षा के केंद्र हैं। एसटीएफ टीम ने फौरन दोनों लैपटॉप के स्क्रीन शॉट लेकर फोटो आरआरबी के चेयरमैन को भेज दी।
लॉज से पकड़े गए तीन लोगों में लॉज मालिक हिमांशु रावत, चंदौली मुगलसराय में शास्त्री कॉलोनी निवासी शैलेंद्र कुमार सिंह, सीपरी बाजार झांसी निवासी राजेश कुमार पांचाल उर्फ विजय कुमार शामिल है। इन तीनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने रसूलाबाद के संयोगिता इंस्टीटयूट में छापा मारकर संचालक राधेश्याम पांडेय और उसके सहयोगी श्रवण मिश्रा को पकड़ लिया। वहां कंप्यूटर के सीपीयू जब्त करने के साथ ही नौ लाख 66 हजार रुपये बरामद किए गए। इनमें राधेश्याम मूल रूप से अम्बेडकर नगर के राजेसुल्तानपुर इलाके का रहने वाला है और बरसों से यहां थरवई क्षेत्र के बहमलपुर में रहकर संस्थान चला रहा था। इन सभी से पूछताछ में पता चला कि पेपर लीक गोरखधंधे का सूत्रधार रेलवे का सीनियर सेक्शन इंजीनियर विनोद प्रसाद गुप्ता है।
एसटीएफ ने फौरन धूमनगंज में शेरवानी मोड़ के भीतर कॉलोनी में छापा मारकर विनोद घर के पास ही दबोच लिया। वह भागने की फिराक में था। एसटीएफ ने बताया कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर विनोद प्रसाद गुप्ता ही पेपर लीक के जरिए परीक्षा पास करने के इच्छुक अभ्यर्थियों, परीक्षा का आनलाइन संचालन करने वाली फर्म टीसीएस के कर्मचारियों तथा परीक्षा केंद्रों में तैनात कक्ष निरीक्षकों से सेटिंग करता था। विनोद के पास रेलवे की भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के 50 प्रवेश पत्र बरामद किए। इन 50 अभ्यर्थियों से यह इंजीनियर परीक्षा पास कराने की सेटिंग कर चुका था। जांच में टीसीएस के आपरेटर अंकुर झा, यमुनापार के इंजीनियरिंग कॉलेज के कर्मचारी विजय शुक्ला, गोंडा में रहने वाले यशवंत सिंह समेत छह लोगों का नाम सामने आए हैं। इनमें यशवंत समेत तीन लोग लीक पेपर के साल्वर हैं। शिवकुटी थाने में मुकदमा लिखकर जांच की जा रही है।
रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक कराकर परीक्षा केंद्रों में बैठे अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने का काम बेहद हाईटेक ढंग से किया जा रहा था। एसटीएफ के डीएसपी प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि जोंधवल तेलियरगंज में लॉज के कमरे में मौजूद तीन लोग टीम व्यूवर साफ्टवेयर के जरिए परीक्षा केंद्रों में बैठे दो परीक्षार्थियों के कंप्यूटर को हैककर दो लैपटॉप पर रेलवे भर्ती परीक्षा का ऑनलाइन पेपर खोले हुए थे। वे पेपर का स्क्रीन शॉट लेकर व्हाट्स एप के जरिए साल्वरों को भेज रहे थे। एक साल्वर यशवंत कुमार गोंडा जनपद का रहने वाला है। वह मैथ और साइंस का एक्सपर्ट है।
यशंवत समेत दूसरे साल्वर फौरन उसका उत्तर भेजते जिसके जरिए दोनों लैपटॉप पर खुले पेपर हल किए जा रहे थे। इस तरह से दो परीक्षार्थियों के पेपर हैकिंग के जरिए लॉज के कमरे में बैठकर ऑनलाइन हल किए जा रहे थे। तीसरे लैपटॉप पर गूगल में सवालों के जवाब खोजे जा रहे थे। इसके अलावा, कई अन्य परीक्षा केंद्रों में भी दर्जन परीक्षार्थियों से पेपर लीक करने वाले गिरोह की सेटिंग कर रखी थी। वहां तैनात कक्ष निरीक्षकों से भी सेटिंग थी। कक्ष निरीक्षकों को व्हाट्स एप के जरिए सवालों के उत्तर भेजे जा रहे थे जो वे चिह्नित परीक्षार्थी को जाकर बताते थे। एसटीएफ के डिप्टी एसपी का तो कहना है कि रेलवे भर्ती पोर्ड की ऑनलाइन परीक्षा पूरी तरह से फेल साबित हो चुकी है।
एसटीएफ को पूछताछ में पता चला कि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने का ठेका आठ लाख से दस लाख रुपये में लिया जाता था। दो लाख रुपये एडवांस बाकी परीक्षा के बाद। बरामद हुए करीब पौने सात लाख रुपये परीक्षार्थियों से मिले एडवांस के ही पैसे हैं। इस गिरोह के लोग कई साल से ऑनलाइन पेपर लीक कराकर परीक्षा पास कराने का ठेका ले रहे थे। इस तरह से रेलवे के इंजीनियर विनोद प्रसाद गुप्ता समेत गिरोह के दूसरे लोगों ने काफी दौलत बनाई। गिरफ्तार राजेश पांचाल उर्फ विजय ने अपने पिता के खाते में साढ़े छह लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। पकड़े गए लोगों में हिमांशु रावत के बारे में बताया गया कि वह एक पूर्व सांसद का भतीजा है। उसका भाई भी सचिन भी एसटीएफ की वांछित सूची में है।
एसटीएफ ने पेपर लीक मामले में लॉज और परीक्षा केंद्र बने संस्थानों में छापेमारी कर नौ लाख 66 हजार रुपये नगद, एक कंप्यूटर, सीपीयू, तीन लैपटॉप, 13 मोबाइल फोन, तीन मोडम, 61 प्रवेश पत्र, 24 स्क्रीन शाट, 59 व्हाट्स एप प्रिंट आऊट, छह लाख रुपये की जमा पर्ची, एक पैन कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता पहचान पत्र बरामद किया है।