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बुझ गया दो परिवारों का कुलदीपक

Sat, 26 Aug 2017 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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डॉ. शाश्वत पांडेय शुरू से मेधावी और होनहार थे। शाश्वत बीएचएस में पढ़ाई के साथ-साथ खेल तथा अन्य कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उनका सपना शहर का नामचीन डॉक्टर बनने के साथ साथ चैरिटी को भी आगे बढ़ाना था। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान अक्सर माता-पिता से कहते थे कि तीन महीने में एमडी का कोर्स पूरा हो जाएगा और इसके बाद इलाहाबाद लौटकर प्रैक्टिस करनी है। उनकी मौत से दो परिवारों का चिराग एक साथ बुझ गया।
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डॉ. शाश्वत माता-पिता की इकलौते बेटे थे। उनकी मां डॉ. शालिनी पांडेय भी अपने पिता डॉ. ओपी बजाज की इकलौती संतान हैं। दोनों परिवारों को शाश्वत से ढेरों उम्मीदें थीं। शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे शाश्वत की दिल्ली में हत्या की खबर उनके पिता तथा अन्य परिजनों को मिली तो सभी अवाक रह गए। धीरे-धीरे रिश्तेदारों को भी इस दुखद घटना की जानकारी हुई तो सभी एलनगंज चर्च लेन स्थित डॉ. संजय पांडेय के घर पहुंच गए। शाश्वत की मां डॉ. शालिनी बेटी नीति के साथ एक दिन पहले दिल्ली चली गईं थीं। बेटे की हत्या की खबर सुनकर पिता डॉ. संजय पांडेय की तबियत खराब हो गई। उनको इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया। एलनगंज स्थित आवास पर आसपास के लोग भी पहुंच गए। सभी की आंखें नम थीं। सभी की जुबां पर शाश्वत की ही चर्चा थी। घर में सजे खेल तथा अन्य प्रतियोगिता में मिले पुरस्कार, मेडल शाश्वत की शाश्वत की याद दिला रहे थे। देर शाम तक उनके घर पर शहर के डॉक्टरों, रिश्तेदार तथा परिचितों के आने और शोक संवेदना व्यक्त करने का सिलसिला चलता रहा।

यात्रिक चौराहे पर शाश्वत के नाना डॉ. ओपी बजाज शहर के नामचीन डॉक्टरों में से हैं। उनके यहां भी रिश्तेदार और परिचितों का शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए तांता लगा रहा। ओपी बजाज इकलौती बेटी हैं डॉ. शालिनी पांडेय, जो कि सरकारी अस्पताल में तैनात हैं। पिता संजय पांडेय की रामबाग में क्लीनिक है। शाश्वत अधिकांश समय अपने नाना के यहां रहते थे।
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रिश्ते के चाचा सुनील पाठक  का कहना है कि डॉ. शाश्वत की मौत से दो परिवारों का चिराग बुझ गया। ओपी बजाज कहते थे कि शाश्वत परिवार की तीसरी पीढ़ी का डॉक्टर है। एमडी की पढ़ाई करने तीन महीने बाद आएंगे तो उनको प्रैक्टिस के टिप्स देंगे और करीब दो तीन महीने तक अपने साथ रखेंगे। लेकिन डॉ. बजाज का यह सपना पूरा नहीं हुआ। नाना डॉ. ओपी बजाज और बाबा आईएएस अधिकारी केबी पांडेय दोनों शाश्वत को कुल का चिराग बताते थे।

सेंट स्टीफेंस हॉस्पिटल में बेटे शाश्वत पांडेय के  शव देखकर मां डॉ. शालिनी पांडेय को दिल का दौरा पड़ गया और वह गश खाकर गिर गईं। पास में खड़े डॉक्टर तथा अन्य स्टाफ उनको एंबुलेंस से उपचार के लिए हार्ट केयर सेंटर ले गए। ड्रॉ. शालिनी पांडेय कल रात को ही बेटी नीति पांडेय के साथ दिल्ली पहुंच गईं थीं। दिल्ली स्थित ब्रिटिश दूतावास के अफसरों ने नीति पांडेय को लंदन में एलएमएम की पढ़ाई के वीजा के संबंध में उनको शुक्रवार सुबह 11 बजे बुलाया था।
डॉ. शालिनी पांडेय सुबह बेटी नीति के साथ ब्रिटिश दूतावास जाने को तैयार हो रहीं थीं। उसी समय डॉ. संजय पांडेय ने शालिनी को फोन किया कि सेंट स्टीफेंस हॉस्पिटल में शाश्वत के साथ कोई घटना हो गई है। उसी के बाद वह दूतावास जाने के बजाय हॉस्पिटल पहुंच गईं। वहां बेटे शास्वत का शव देखकर गिर पड़ीं। उनको बेटी और आसपास के डॉक्टरों ने संभाला और हार्ट केयर यूनिट में उपचार के लिए ले गए। बेटे की हत्या की खबर पिता संजय पांडेय को मिली तो उनकी भी तबियत बिगड़ गई। उनका भी इलाज प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है।

चाचा सुनील पाठक का कहना है कि दिल्ली में देर शाम पोस्टमार्टम हो गया है। शनिवार को शाश्वत का शव इलाहाबाद लाया जाएगा। उसी के बाद अंत्येष्टि की जाएगी।  पत्रिका चौराहा स्थित डॉ. ओपी बजाज के घर पिछले महीने नौकरानी मैसी का गला रेतकर लूट की कोशिश की गई थी। लुटेरा नौकरानी को मृत समझकर चला गया था। कई घंटे बाद डॉ. बजाज और उनकी बेटी शालिनी घर आईं तो नौकरानी खून से लथपथ बेड पर पड़ी हुई मिली थी। इस घटना का पुलिस ने खुलासा करके टायलेट साफ करने के लिए आने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया था।
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