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पुलिस पहरे में सूनी रही गलियां

Tue, 03 May 2016 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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विश्वविद्यालय में सोमवार को आन लाईन परीक्षा का विरोध कर रहे छात्रों पर लाठी चार्ज हुआ। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रेडलाइट एरिया मीरगंज की बदनाम गलियां पुलिस पहरे में सोमवार को पहली बार सूनी दिखीं। ऐसा सन्नाटा पहले कभी नहीं रहा। कोठों में ताले लगे थे। चाय-पान की गुमटियों पर भी सन्नाटा रहा पसरा क्योंकि न तो कोठों में तवायफों के पास आने वाले शौकीन थे और न दलाल। कोठों में छापेमारी से अनजान कुछ ग्राहक उधर आए भी तो खाकी वर्दीधारियों को देख खुद खिसक लिए या पुलिस ने ही उन्हें फटकारा तो भाग गए। इस हालात से आसपास के सराफा कारोबारी और दूसरे दुकानदार खुश हैं क्योंकि बदनाम गलियों की वजह से उनके पास अच्छे कस्टमर नहीं आते थे।
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पिछले छह दशक से भी ज्यादा वक्त से मीरगंज में वेश्यावृत्ति का गलीच धंधा चल रहा था। पुराने लोग बताते हैं कि पहले कोठों में घुंघरू की खनक और तबलों की थाप सुनाई देती थी लेकिन धीरे-धीरे वहां जिस्मफरोशी जोर पकड़ती गई। बिहार, बंगाल, नेपाल, उड़ीसा समेत कई राज्यों से गरीब परिवार की लड़कियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर यहां मीरगंज की काली कोठरियों में धकेल दिया जाता था। कई बार लड़कियों ने इस जाल से छुटकारा पाने के लिए कोठों की छत से छलांग लगाकर भागने की कोशिश की तो सच सामने आता लेकिन धंधा बदस्तूर चलता रहा। जनहित याचिकाओं की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर जिला पुलिस-प्रशासन ने एक महीने की तैयारी के बाद रविवार दोपहर मीरगंज के कोठों में छापा मारकर वेश्वावृत्ति में लिप्त 109 औरतों-लड़कियों तथा दो कोठा संचालिकों को पकड़ा। 10 पुरुषों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के ऑपरेशन फ्रीडम के तहत सभी कोठों को खाली कराकर उन्हें सील कर दिया गया। अभियान की समाप्ति के बाद भी गलियों में जगह-जगह पुलिस टुकड़ियों की तैनाती की गई है। कोठों में ताला और पुलिस की मुस्तैदी की वजह मीरगंज की बदनाम नेपाली गली और पहाड़ी गली में सन्नाटा छाया रहा। गलियों के कोनों पर चाय-गुटका की गुमटियों पर भी रोज की तरह न दलाल दिखे और न ग्राहक। ज्यादातर गुमटियां पुलिसवालों के डर से बंद ही रहीं। अलबत्ता, गलियों के आसपास की दुकानें खुली रहीं। व्यपारियों ने इस कार्रवाई पर प्रसन्नता जाहिर की क्योंकि रेडलाइट एरिया होने से कस्टमर कम आते थे। 

33 औरतों और 10 पुरुषों को भेजा जेल
रेडलाइट एरिया मीरगंज के कोठों से गिरफ्तार 33 महिलाओं और दस पुरुषों को देह व्यापार का संचालन करने और इसमें लिप्त होने के आरोप मुकदमा लिखकर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया। एडीएम सिटी विशाल सिंह ने बताया कि कोठों से निकाली गई बाकी 71 औरतों-लड़कियों को पीड़ित माना गया। उन्हें मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर आगरा के पुर्नवास केंद्र में भेजा जाएगा। वहां उनकी काऊंसलिंग कराई जाएगी। परिवार का पता लगाकर उन औरतों-लड़कियों को घर भेजने की कोशिश की जाएगी। जिनके घर-परिवार का पता नहीं लगाया जा सकेगा तो कौशल विकास के तहत उन्हें रोजगार दिलाने का प्रयास होगा। कोठों से औरतों के साथ 34 बच्चों को भी निकाला गया था। पांच साल से कम आयु के बच्चों को उनकी मां के साथ रहने दिया जाएगा जबकि बाकी को बाल संरक्षण गृह या अनाथालय में रखा जा सकता है। 
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पुलिस की शह पर  ही होता रहा धंधा 
अदालत के आदेश पर रेडलाइट एरिया मीरगंज के कोठों को पुलिस ने रविवार को खाली करा लिया लेकिन यह भी सच है कि उन कोठों में धंधा भी खाकी की सरपरस्ती में ही चल रहा था। दरअसल, रेडलाइट एरिया मीरगंज से कोतवाली पुलिस को मौजूदा समय में रोज 20 से 30 हजार रुपये की अवैध कमाई हो रही थी। कई सिपाही भी रोज हजार से दो हजार रुपये जेब में ले जाते थे। पुलिसवाले कोठों से धन उगाही करने के अलावा गलियों में ग्राहकों को भी पकड़कर घर में बताने की धमकी देकर उनसे पैसे, मोबाइल, घड़ियां, चेन, अंगूठी तक छीन लेते थे। बादशाही मंडी चौकी और कोतवाली में तैनाती के लिए इसीलिए दरोगा और सिपाही लालायित रहते क्योंकि मीरगंज से मोटी कमाई होती थी। इन पैसों का लालच ही था कि पुलिस गाहे-बगाहे दिखावे के लिए छापेमारी कर दो-चार औरतों को पकड़ती लेकिन धंधा पूरी तरह नहीं बंद कराती ताकि कमाई जारी रहे। 

भनक लगने पर तमाम औरतें पहले ही भागी 
मीरगंज के कोठों में छापेमारी की तैयारी की रोज से चल रही थी। पुलिस-प्रशासनिक अफसर इधर तीन-चार रोज से रात में जाकर इलाके की रेकी कर धरपकड़ अभियान की योजना बना रहे थे। ऐसे में कोठे के भीतर भी भनक लगी कि कुछ तो गड़बड़ होने वाला है। पता चला है कि खतरा भांपकर करीब दो दर्जन औरतें-लड़कियां दो रोज पहले ही कोठों से निकल भागी थीं। वे शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर किराए पर कमरे लेकर टिक गईं। कोतवाली इलाके के ही आजाद नगर में भी एक मकान में आधा दर्जन से ज्यादा औरतों ने पनाह ली है।  
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