कोतवाली क्षेत्र के मामा भांजा तालाब मोहल्ले में बुधवार रात किराना दुकानदार इंद्रकुमार साहू ने अपनी पत्नी और उसके प्रेमी को मार डाला। पत्नी की बेवफाई से बौखलाए पति ने पहले पत्नी और उसके प्रेमी को चाय में नींद की गोली दी। फिर प्रेमी के साथ शराब भी पी। वे दोनों बेहोश हो गए तो गला घोंटकर उनकी हत्या के बाद इंद्रकुमार ने नैनी थाने में सरेंडर कर दिया। उसने दोहरे कत्ल की जानकारी तो पुलिस ने उसके घर जाकर दोनों शवों को सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
चक गरीब दास मामा भांजा तालाब मुहल्ले में रहने वाले इंद्रकुमार साहू ने घर में किराना और चाय नाश्ते की दुकान खोल रखी है। पिछले हिस्से में वह पत्नी गीता साहू (32) और चार बच्चों के साथ रहता था। बुधवार भोर में इंद्रकुमार ने नैनी थाने जाकर पुलिसवालों से कहा कि उसने अपने घर के भीतर पत्नी गीता को उसके प्रेमी रीतेश समेत मार डाला है। उन दोनों की लाश कमरे में ही पड़ी है। यह सुनकर पुलिसवाले सकते में रह गए। उसे लेकर पुलिस मौके पर पहुंची तो वास्तव में गीता और रीतेश मृत मिले। खबर फैली तो भीड़ लग गई। रीतेश के भी परिजन वहां आ गए। पुलिस ने दोनों शवों को सीलकर पोस्टमार्टम के लिए चीरघर भेज दिया।
इंद्रकुमार ने पुलिस को बताया कि पड़ोस में रहने वाले 23 वर्षीय रीतेश सोनी (23) पुत्र ओमप्रकाश सोनी का करीब तीन साल से उसके घर आना-जाना बना था। तब उसने ध्यान नहीं दिया मगर छह महीने पहले वह अचानक घर आया तो कमरे में पत्नी गीता को रीतेश के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। उस दिन हुए झगड़े के बाद रीतेश ने इंद्र कुमार के घर आना बंद कर दिया था। पत्नी गीता से इंद्रकुमार के बीच अक्सर झगड़ा होने लगा। इंद्रकुमार ने पुलिस से कहा कि इधर करीब 10 दिन से गीता और रीतेश ने खुलेआम मिलना शुरू कर दिया। वह दुकान में रहता और उसके सामने रीतेश घर के अंदर उसकी पत्नी गीता के पास चला जाता।
इंस्पेक्टर नैनी अवधेश प्रताप सिंह के मुताबिक, इस अवैध रिश्तेे से बौखलाए इंद्रकुमार ने पांच दिन पहले पत्नी गीता और उसके प्रेमी रीतेश को मारने की साजिश रची। इसी योजना के तहत वह रीतेश से खुद भी बातचीत करने लगा। बुधवार रात वह नींद की 20 गोलियां खरीद लाया। रात नौ बजे दुकान बंद करने के बाद घर के भीतर गया तो गीता खाना बनाने की तैयारी में थी। उसका प्रेमी रीतेश भी कमरे में मौजूद था। वह टीवी देख रहा था। कत्ल के इरादे से इंद्रकुमार ने खुद चाय बनाकर रीतेश और गीता को कप में दी। उन दोनों के कप में उसने नींद की गोलियां मिला दीं।
उस चाय को पीने के बाद बाद भी जब वे दोनों बेहोश नहीं हुए तो इंद्रकुमार शराब की बोतल खरीदकर ले आया। उसने रीतेश के साथ शराब पी। आधी रात तक वे दोनों शराब पीते रहे। इस बीच गीता सोने चली गई। रीतेश नशे में धुत हुआ तो इंद्रकुमार उसे खींचकर दुकान के पीछे वाले कमरे में ले गया। वहां गला दबाकर रीतेश की हत्या कर दी। फिर वह पत्नी गीता को भी उसे कमरे में खींच लाया। गीता ने बचने की कोशिश करते हुए विरोध किया मगर इंद्र कुमार ने दुपट्टे से गला घोंटकर उसे भी मार डाला। रात भर वह दोनों की लाश के पास बैठा रहा। भोर में वह घर से निकला और कोतवाली पहुंचा। उसने पुलिस से कहा कि उसे कत्ल का पछतावा नहीं है क्योंकि पत्नी ने उसके साथ बेवफाई की और अब तो खुलकर धोखा देने लगी थी। उसे इस बात का अफसोस है कि उसके चारों बच्चे बेसहारा हो गए। पत्नी को उसने मार डाला और वह खुद जेल में रहेगा तो बच्चों की देखभाल कैसे हो सकेगी।