यमुनापार में शंकरगढ़ कस्बे के वार्ड नंबर आठ में रहने वाले पूर्व पार्षद शांति देवी (42) की घर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनके चेहरे पर भी धारदार हथियार से वार किए गए। पति के नौकरी पर बाहर और बेटे के नैनी जाने के कारण वह मंगलवार रात घर में अकेली थी। बुधवार रात बेटा नैनी से लौटा तो ताला बंद कमरे के भीतर रजाई में रक्तरंजित लाश मिली। खबर पाकर कई थानों की पुलिस के साथ अधिकारी पहुंच गए। फील्ड यूनिट को भी खोजी कुत्ते के साथ बुलाया गया। फिलहाल कातिलों का पता नहीं चल सका है।
वार्ड नंबर आठ में रहने वाली शांति देवी बसपा शासन के दौरान नामित सभासद रही थीं। उनके दो बच्चे हैं। बेटी नीलम का ब्याह हो चुका है। बेटा पंकज 20 साल का है। पति गुलजारी लाल दूसरे जिले में रहकर नौकरी करते हैं। मंगलवार को पंकज किसी काम से नैनी गया तो शांति देवी घर में अकेली थीं। पंकज बुधवार रात करीब आठ बजे घर लौटा तो मुख्य दरवाजे में बाहर से ताला लगा था। वह किसी तरह सीढ़ी लगाकर छत के जरिए नीचे उतरकर कमरे में गया तो वहां का नजारा देख सन्न रह गया। उसकी मां शांति का खून से लथपथ शव रजाई में था। उसकी कनपटी पर सुराख था। चेहरे पर भी गहरे घाव थे। पंकज ने शोर मचाया तो आसपास के लोग आ गए।
फिर कार्यवाहक थानाध्यक्ष अजीत उपाध्याय आ गए। कई थानों की पुलिस पहुंची। देर रात अफसर भी आए और शहर से फील्ड यूनिट तथा खोजी कुत्ते को बुलाया। शांति की बेटी नीलम भी ससुराल से रोते-कलपते आ गई। पुलिस शांति का शव घर से निकालकर ले जाने लगी तो पंकज और नीलम ने रोते-चीखते विरोध कर दिया कि कातिलों को पकड़ने के बाद ही शव हटाया जाए। ऐसे में पुलिस ने शव वापस कमरे में रख दिया। शव के निरीक्षण के बाद पुलिस का कहना है कि पूर्व पार्षद शांति की हत्या कनपटी पर गोली मारकर की गई है। उनके चेहरे पर भी धारदार हथियार से प्रहार किए गए थे। फिलहाल कातिलों का कोई क्लू नहीं मिल सका है।