पुलिस को हाईटेक बनाने की कोशिशें परवान पर हैं। चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लग रहे हैं और अपराधियों का पीछा करने के लिए स्कार्पियो, इनोवा जैसी गाड़ियां दी जा रही हैं लेकिन जिले की पुलिस अब भी एफआईआर दर्ज करने के लिए कलम घिस रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर की बात है, शहर के 14 थानों में से सिर्फ तीन में ही कंप्यूटर पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। बाकी के थानों पर कंप्यूटर मालखाने में पड़े धूल फांक रहे हैं।
शहर में कंप्यूटर से एफआईआर सिर्फ सिविल लाइंस, जार्जटाउन और कैंट थाने में ही दर्ज हो रही है। हाईटेक बनने जा रही पुलिस कोतवाली, शाहगंज, खुल्दाबाद, करेली, धूमनगंज, कीडगंज, मुट्ठीगंज, अतरसुइया, कर्नलगंज, शिवकुटी तथा दारागंज थाने में अब भी एफआईआर कलम से ही दर्ज कर रही है। गंगापार और यमुनापार के थानों का भी यही हाल है। ग्रामीण क्षेत्र के थानेदार बिजली का रोना रोते हैं। ऐसा तब है जबकि हर थाने को जेनरेटर मिल चुके हैं। कंप्यूटरीकरण में देरी पर शासन की कई बार फटकार भी लगी है लेकिन जिले की पुलिस अब भी चींटी की चाल से चल रही है। देरी की वजह यह भी है कि पुलिस कर्मियों को कंप्यूटर देखकर ही पसीना आने लगाता है। पुलिस वाले शुरू से ही कंप्यूटर से दूर भाग रहे हैं। आईजी जोन दलजीत सिंह चौधरी ने कंप्यूटरीकरण में देरी को गंभीरता से लिया है। उन्होंने जोन के सभी कप्तानों को एक माह के भीतर कंप्यूटर से एफआईआर दर्ज की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया की वह खुद निगरानी करेंगे। जोन में लगभग 150 थाने हैं। कंप्यूटर पर एफआईआर दर्ज होने के बाद सभी थाने आपस में जुड़ जाएंगे। इसके बाद केस डायरी भी ऑनलाइन हो जाएगी। पुलिस अफसरों को विवेचना की प्रगति जानने के लिए जांच अधिकारी को बुलाना नहीं होगा। वह अपने कंप्यूटर पर ही विवेचना की प्रगति देख सकेंगे।