पुलिस अफसरों की संवेदनहीनता से निराश होकर गैंगरेप की शिकार किशोरी और उसकी मां के पुलिस लाइन में गले लगकर रोने की खबर का असर हुआ है। अमर उजाला में फोटो के साथ खबर छपने पर अफसरों की नींद टूटी और एसपी गंगापार को कार्रवाई के लिए झूंसी थाने भेजा गया। पुलिस ने दबिश दी लेकिन कोई भी पकड़ में नहीं आया। हालांकि पीड़ित परिवार का कहना है कि झूंसी पुलिस बिक चुकी है।
करीब 17 वर्षीय इस किशोरी का फरवरी में अपहरण होने के बाद से ही उसके परिजन थाने से लेकर डीआईजी की चौखट तक दौड़ते रहे लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। अगस्त में किशोरी किसी तरह अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर लौटी तो उसने बताया कि उसे रीवा से लेकर करेली तक चार लोगों के हाथों बेचा गया। 13 लोगों ने रेप किया। यातना दी गई। उसकी दास्तां ने परिजनों और रिश्तेदारों को झकझोर दिया। पीड़ित किशोरी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी यही बयान दिया मगर झूंसी पुलिस पर कोई असर नहीं हुआ। बहुत मिन्नत के बाद झूंसी थाने में केस लिखा गया लेकिन अपहरण तथा सामूहिक दुराचार की संगीन घटना में किसी आरोपी को नहीं पकड़ा गया। निराश होकर बुधवार को पीड़ित लड़की के साथ उसकी मां पुलिस लाइन में गुहार लगाने पहुंची।
उसने अफसरों की मौजूदगी में आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने आरोपियों से लाखों रुपये खा लिए हैं इसलिए पुलिस चुप बैठी है। पुलिस के रवैये से दुखी मां-बेटी पुलिस लाइन में गले लगकर रोने लगी। तब एसपी क्राइम ने एसपी गंगापार से कहा कि वह खुद कार्रवाई करें। बृहस्पतिवार को अमर उजाला में मां-बेटी की गले लगकर रोते हुए तस्वीर के साथ खबर छपने पर आला अफसरों ने नाराजगी जाहिर की तो एसपी गंगापार राजेश श्रीवास्तव ने झूंसी थाने जाकर इंस्पेक्टर, जांच अधिकारी तथा सीओ (आईपीएस) गणेश साहा से इस पर मंथन किया। पुलिस ने नामजद आरोपियों के घर छापेमारी की। हालांकि गिरफ्तारी किसी की नहीं हो सकी। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी पकड़े जाएंगे। उधर, लड़की के माता-पिता का आरोप है कि आरोपियों ने एक जमीन बेचकर पुलिसवालों को लाखों रुपये दिए जिससे उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है।
‘मैंने खुद थाने जाकर इस मसले में जानकारी लेने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम भेजी। गैर जमानती वारंट भी जारी कराया गया है। आरोपी गिरफ्त में नहीं आए तो उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्यवाही शुरू की जाएगी।’
-राजेश कुमार, एसपी गंगापार