इलाहाबाद। जंगल से जुड़ी कहानियां वैसे भी लोगों को रोमांचित करती रही हैं। ठीक वैसा ही रहस्यमय दुनिया रही है चित्रकूट और चंबल के जंगलों में सक्रिय रहे खूंखार डाकू गिरोहों की। घने जंगल और बीहड़ में पुलिस मुठभेड़ों में दस्यू सरगनाओं के ढेर होने की घटनाओं में भी गहरा राज रहा है। पुलिस ने हर बार दावा किया कि डाकू सरदार मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से मारा गया लेकिन असल किस्सा कुछ और रहा है। सच तो यह है कि लगभग सभी दस्यू सरगना मुखबिरों के दम पर गैंग में भितरघात के जरिए जहर खिलाकर या बम हमले में मारे गए और बाद में कहानी गढ़ी गई।
बुंदेलखंड के जंगल में करीब तीन दशक तक आतंक का दूसरा नाम था शिवकुमार उर्फ ददुआ का। पुलिस ने ददुआ का खात्मा करने के लिए करोडों रुपये फूंक दिए। मगर पुलिस उसका बाल भी बांका नहीं कर सकी। अलबत्ता ददुआ ही अक्सर पुलिस के लिए काल साबित होता रहा। यूपी शासन ने पूरी ताकत लगा दी लेकिन आखिर में ददुआ मारा गया तो उसकी मौत पर राज बना रहा। पुलिस मुठभेड़ की कहानी से इतर जंगल से छनकर आई जानकारी तो यह रही कि पुलिस ने ददुआ को जाल में फंसाने के लिए गैंग में भितरघात करा दी थी। आखिर में वह 22 जुलाई 2007 को नहाते समय बम से मार दिया गया और शाबासी लूटी पुलिस ने। यह सच है कि ददुआ का खात्मा पुलिस की कोशिशों के चलते ही हुआ लेकिन जंगल में डाकू सरगना की मौत पर रहस्य बना रहा।
ददुआ के बाद अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया ने यूपी और मध्य प्रदेश पुलिस की नाक में दम कर दिया। ददुआ की मौत के बाद राहत की सांस ले रही पुलिस के लिए ठोकिया बड़ी चुनौती बनकर उभरा। उसने सतना और चित्रकूट में डकैती, हत्या, अपहरण लूट, फिरौती और रंगदारी वसूली की वारदातों की झड़ी लगा दी थी। उसकी खूंखारता का आलम यह कि 22 जुलाई 2007 को चित्रकूट के बैडा जंगल में उसने घात लगाकर हमले में एसटीएफ के सात जवानों को मार दिया। एसटीएफ के कई कमांडों गंभीर जख्मी हुए। एसटीएफ की टीम ऑपरेशन ददुआ की कामयाबी के बाद लौट रही थी तभी ठोकिया ने घेर लिया। इससे पहले 2004 में उसने दो सिपाहियों को गोली मारकर दो राइफल लूट ली थी। आखिरकार चार अगस्त 2008 को ठोकिया भी मारा गया। मगर उसकी मौत पर भी रहस्य का घना साया रहा। चर्चा तो रही कि पुलिस ने गैंग में घुसपैठ कराकर ठोकिया को जहर के जरिए मौत की नींद सुला दिया था। बाद में उसे मुठभेड़ में ढेर बताया गया।
करीब 12 साल पहले ऊरई में कुख्यात लाठी वाला डकैत की मौत में भी राज बना रह गया। चर्चा रही कि वह सांप के डसने से मरा था मगर पुलिस ने उसे मुठभेड़ में हलाक दिखा दिया। अब छह लाख रुपये के इनामी दस्यू सरगना बलखड़िया की चित्रकूट के मारकुंडी जंगल में मौत पर कुछ साफ नहीं है। पुलिस का कहना है कि वह दो जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मरा तो साथियों ने उसकी लाश जला दी। यानी पुलिस के पास अभी उसकी मौत के ठोस सुबूत नहीं सिवाय कुछ फोटो के। चर्चा तो रही कि वह करंट से झुलसने के बाद मर गया था। हालांकि इतनी चर्चाओं के बावजूद यह भी हकीकत है कि पुलिस ने इन डाकुओं के खात्मे में कोई कसर नहीं छोड़ी।