धूमनगंज के पीपलगांव में एक घर के पांच लोगों की मौत के बाद मंगलवार को सभी के शवों का पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाए गए तो वहां कोहराम मच गया। देर रात एक साथ पांचों शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जाने लगे तो वहां मौजूद लोगों का कलेजा कांप गया। इस दौरान सभी की आंखें नम हो गईं।
शाम साढ़े छह बजे के करीब पोस्टमार्टम होने के बाद शव लेकर परिजन घर के लिए रवाना हुए। आठ बजे के करीब शव घर लाए गए तो वहां कोहराम मच गया। पिता गुलाबचंद बेटे के शव से लिपटकर रोने लगे। भाइयों गोपाल व कल्लू के साथ ही घटना की जानकारी पर आई मनोज की बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल था। उधर, मायकेवाले बेटी श्वेता व उसकी मासूम बेटियों के शव देख बदहवास से हो गए थे। शव लाए जाने पर मृतकों के घर के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुट गए थे। एक साथ पांच अर्थियां उठती देख ग्रामीणों का भी कलेजा कांप गया। हालात यह रहे कि गांव की महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं। उधर पुरुषों की भी आंखें नम हो गईं। किसी तरह घरवालों को संभाला गया, जिसके बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। 8.45 बजे घर से निकली अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इस दौरान धूमनगंज थाने की फोर्स भी तैनात रही। ग्रामीण घरवालों को ढांढस बंधाते रहे। रात सवा नौ बजे के करीब पांचों शवों को कन्हईपुर घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आक्रोशित पिता ने जमकर सुनाई खरीखोटी
उधर, घटना की खबर रात में मायकेवालों को मिली तो वह स्तब्ध रह गए। पिता अभयराज के साथ श्वेता का बड़ा भाई झल्लर व अन्य घरवाले सुबह छह बजे के करीब पीपलगंाव पहुंच गए। वहां पहुंचने पर पिता अभयराज अपना आपा खो बैठा। उसने मनोज के भाई व पिता को जमकर खरी-खोटी सुनाई। परिवार के लोगों ने उसे समझाया तो वह बिलखने लगा। वह बार-बार यही कहता रहा कि श्वेता ने उसे कभी कुछ नहीं बताया। मनोज के इस रूप के बारे में उसे जरा भी अंदेशा होता तो वह कभी अपनी बेटी का रिश्ता उसके साथ नहीं करता।
कभी सोचा नहीं था, ऐसा भी कर सकता है मनोज
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद श्वेता का भाई झल्लर भी बहन और भांजियों की मौत पर स्तब्ध था। उसने बताया कि पति-पत्नी के बीच नोकझोंक हर जगह होती है और मनोज व श्वेता भी इससे अछूते नहीं थे। लेकिन झगड़ा इस हद तक पहुंच जाए कि बात मरने-मारने तक पहुंच जाए, ऐसा कभी नहीं लगा। श्वेता ने भी कभी कोई शिकायत नहीं की। फोन पर मनोज से भी अक्सर ही बात होती थी। छह महीने पहले श्वेता मायके आई थी। हालांकि मां से उसकी अक्सर बात होती थी। मां से भी उसने कभी ऐसी कोई बात नहीं बताई।
पिता बोला, आखिर क्यों लेता कर्ज
घटना के बाद चर्चा रही कि मनोज कर्ज में डूबा था और उसने इस कारण से घटना को अंजाम दिया। हालांकि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद पिता गुलाबचंद ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उसने कहा कि घर का पूरा खर्च वह उठाता था। कमरों का भले ही बंटवारा हो चुका हो लेकिन घर का खाना अब भी साथ ही बनता था। परिवार में पैसेे की ऐसी कोई किल्लत भी नहीं थी। उसने बताया कि मनोज की किसी तरह की कोई देनदारी नहीं थी।