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कमरे में आग का गोला बनकर दौड़ी किशोरी, मौत 

Tue, 31 May 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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थाना क्षेत्र के तुलापुर गांव में सोमवार की सुबह एक किशोरी ने घर के भीतर कमरे में आग लगाकर जान दे दी। इसके पहले वह काफी देर तक कमरे के भीतर आग का गोला बनकर दौड़ती रही। बाद में बुरी तरह झुलसने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों की सूचना पर इलाकाई पुलिस मौके पर पहुंची तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चीरघर भेज दिया। किशोरी के खुदकुशी करने के कारणों का पता नहीं चल सका है। परिजन भी इस बाबत कुछ बताने को नहीं तैयार थे।
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थाना क्षेत्र के तुलापुर गांव निवासी जगदीश की चार संताने हैं। बेटे महेंद्र और रामू यहीं पर एक ही परिसर में अलग-अलग मकान बनाकर परिवार के साथ रहते हैं। जगदीश की पत्नी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। जगदीश छोटी बेटी मनोरंजनी (17) के साथ परिसर में ही बने अलग घर में रहता है। इन दिनों वह बड़ी बेटी गुलाब कली के घर सैदाबाद गया था। घर पर बेटी मनोरंजनी अकेली थी। उसकी भाभी अनीता ने बताया कि रविवार की शाम को उसके सिर में दर्द था। इस पर उसने मनोरंजनी को सिर दर्द की दवा भी दी थी। पर उसने दवा खाई नहीं और हाथ में लिए ही सो गई। सोमवार की सुबह उसने दोबारा मनोरंजनी से सिरदर्द के बारे में पूछा लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और कमरे में चली गई। उसने कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। तकरीबन साढ़े सात बजे उसने कमरे के भीतर अपने शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। वह कमरे के भीतर आग का गोला बनकर दौड़ती रही। काफी देर बाद उसकी चीख सुनकर पास में मौजूद भाई और अन्य परिजन मौके की ओर दौड़े। उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन दरवाजा भीतर से बंद होने के कारण वे कुछ नहीं कर पाए। बुरी तरह झुलसने के बाद किशोरी की मौके पर ही मौत हो गई। कमरे के भीतर रखा सारा सामान भी जलकर राख हो गया था। परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी तो वह मौके पर पहुंची। दरवाजा तोड़कर पुलिस ने किशोरी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चीरघर भेजा। सूचना पर उसका पिता जगदीश भी रोते-बिलखते घर पहुंचा। हालांकि किशोरी की खुदकुशी के कारण का पता नहीं चल सका है। उसकी भाभी अनीता भी इस बाबत कुछ नहीं बता सकी। ग्रामीण भी इस बाबत कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे। 

दिनदहाड़े किशोरी कमरे में जलती रही और परिजनों को भनक भी नहीं लगी
किशोरी के कमरे के ठीक सामने दूसरे मकान में उसके बड़े भाई रामू और उसके बगल में दूसरे भाई महेंद्र के मकान का कमरा है। आश्चर्य तो इस बात पर है कि किशोरी ठीक सामने के मकान के कमरे में दिनदहाड़े आग का गोला बनकर दौड़ती रही और किसी को कुछ पता नहीं चला। घरवालों ने उसकी चीख पर भी तब ध्यान दिया जब तक वह जान की बाजी हार चुकी थी। घनी बस्ती के बीच मकान होने के बावजूद पड़ोसी भी किशोरी को बचाने के लिए आगे नहीं आए। मनोरंजनी की भाभी अनीता का कहना है कि जब उसने आग लगाई, वह रोटी सेंक रही थी। कमरे से धुंआ उठने पर उसे घटना की जानकारी हुई। बड़े भाई रामू का कमरा तो ठीक सामने ही था। पर उसे भी छोटी बहन की चीख नहीं सुनाई दी। 
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