जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एके बंसल हत्याकांड की छानबीन के दौरान एसटीएफ ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए तो पता चला कि दो शूटर करीब 15 मिनट तक हॉस्पिटल के भीतर रहे। यह हैरानी वाली बात है कि इतनी देर तक बदमाश अस्पताल में रहे लेकिन किसी कर्मचारी को उनका हुलिया नहीं याद है और अस्पताल के अंदर लगे तमाम सीसीटीवी फुटेज में भी वे दिखे नहीं। इसकी बड़ी वजह खराबी की वजह से कई कैमरों का बंद रहना। एक और चौंकाने वाली बात यह है कि गोली मारने वाले शूटर ने दो पिस्टल का इस्तेमाल किया था। मौके पर मिले चार खोखे अलग-अलग बोर के कारतूसों के थे।
एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने बृहस्पतिवार रात करीब सात बजे डॉ.एके बंसल की उनके चैंबर के भीतर गोलियां मारकर हत्या के बाद शूटरों का हुलिया देखने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक की। शूटर मेन गेट की बजाय हॉस्पिटल के पिछले रास्ते से अंदर आए थे। पिछले रास्ते में ही वाहन स्टैंड भी है। वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से शूटरों के हॉस्पिटल में घुसने और बाहर निकलने के वक्त पता चला। सीसीटीवी फुटेज से जानकारी मिली कि देर शाम करीब छह बजकर 50 मिनट पर शूटर पिछले गेट से दाखिले हुए। दोनों शूटरों के बीच करीब 15 कदम का फासला था। दोनों ही बदमाश लंबे कद के नजर आए।
पहले दाखिल होने वाले बदमाश ने सिर पर मफलर बांध रखा था जबकि दूसरे ने कैप पहनी थी। दोनों के पैरों में जूते थे। अस्पताल में घुसने के बाद सात बजकर पांच मिनट पर सीसीटीवी फुटेज में वही दोनों पिछले रास्ते से भागते दिखे हैं। डॉ. बंसल को गोलियां मारकर भागते वक्त वे दोनों साथ थे। बदमाशों के गेट से निकलने के बाद पीछे से कई लोग भागते नजर आए।
यह साफ नहीं हो सका है कि बदमाशों के पीछे भागते दिखे लोग वास्तव में उन्हें पकड़ने के लिए पीछा कर रहे थे या फिर वे गोलियां चलने के बाद घबराकर बाहर की तरफ भाग रहे थे। हालांकि अस्पताल कर्मचारियों से पूछताछ में किसी ने भी कहा कि भाग रहे बदमाशों को पकड़ने का प्रयास किया गया था। ऐसे में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एसटीएफ भी यही मान रही है कि बदमाशों के कुछ कदम पीछे भागते दिखे लोग घबराकर बाहर की तरफ गए थे। जांच टीमों को इस बात का अचंभा है कि दोनों बदमाश तकरीबन 15 मिनट तक अस्पताल में डॉ.बंसल के चैंबर के आसपास टहलते रहे लेकिन किसी सीसीटीवी फुटेज में वे दिखे नहीं। अनुमान है कि शूटरों को मौके की तलाश थी। जैसे ही मौका मिला, 30 सेकंड में गोलियां बरसाई और भाग निकले।
हत्याकांड की जांच में एक और तथ्य सामने आया है। बृहस्पतिवार को घटना के बाद रात तक यही माना गया था कि चैंबर में घुसे एक शूटर ने इकलौती पिस्टल से डॉ.बंसल पर फायर किए थे, मगर मौके पर मिले चार खोखों को देखने पर कुछ और ही पता चला है। इनमें तीन खोखे प्वाइंट 32 बोर कारतूस और एक खोखा प्वाइंट 30 कारतूस का था। इससे इस घटना में पेशेवर सुपारी किलर का हाथ होने की बात और पुख्ता हो गई है।
कत्ल सुपारी देने वाले व्यक्ति और लेने वाले बदमाश ने तय किया था कि किसी भी सूरत में डॉ. बंसल बचने नहीं पाएं। इसी वजह से शार्प शूटर हमले के लिए दो पिस्टल लेकर चैंबर में घुसा था। पहले तीन गोलियां तो प्वाइंट 32 बोर के पिस्टल से मारी और फिर आखिरी गोली प्वाइंट 30 पिस्टल से दागी। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि प्वाइंट 30 का कारतूस साइज में कुछ बड़ा होता है। इसकी मार ज्यादा घातक होती है। इसी वजह से शूटर ने तीन गोलियां मारने के बाद आखिरी गोली प्वाइंट 30 से दागी ताकि डॉक्टर बच नहीं सकें।
क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की जांच में पता चला कि जीवन ज्योति हॉस्पिटल में 60 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं लेकिन उनमें 14 कैमरे खराब थे। 14 में भी सात खराब कैमरे निचले हिस्से के हैं। उनमें तीन कैमरे पिछले रास्ते से डॉक्टर के चैंबर के बीच लगे हैं मगर वे भी काम नहीं कर रहे थे जिससे शूटर नहीं देखे जा सके।
एसएसपी शलभ माथुर नेे बताया कि घटना के वक्त डॉक्टर के साथ मौजूद रहे शैलेंद्र पाठक समेत हॉस्पिटल के कुछ अन्य कर्मचारियों से पूछताछ में सामने आए हुलिए के आधार पर गोली मारने वाले शूटर का स्केच तैयार किया जा रहा है। स्केच बनने पर उसे दूसरे सभी थानों की पुलिस को भेजा जाएगा ताकि उस हुलिया के अपराधियों की धरपकड़ की जा सके।
डॉ.बंसल हत्याकांड में पुलिस को कोई क्लू नहीं मिल रहा है ऐसे में पुराना तरीका अपनाते हुए संदिग्ध अपराधियों को उठाकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। एसएसपी ने भी माना कि शुक्रवार को क्राइम ब्रांच और एसटीएफ ने 19 संदिग्ध लोगों को उठाकर पूछताछ की। रात में कुछ लोगों को छोड़कर बाकी से पूछताछ की जा रही थी। इसमें यमुनापार के भी कई अपराधी हैं। एसटीएफ पूर्वांचल के उन बदमाशों की टोह में लगी है जो वाराणसी, गाजीपुर से भागकर यहां फरारी काट रहे हैं। पिछले दिनों जेल गेट पर हुए दोहरे हत्याकांड में भी पूर्वांचल के बदमाशों की गिरफ्तारी की गई थी।