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दोहरे कत्ल में सात लोग नामजद

Sun, 27 Sep 2015 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। धूमनगंज के मरियाडीह गांव में शुक्रवार रात फारच्यूनर पर गोलियां बरसाकर प्रधान आबिद की चचेरी बहन तथा ड्राइवर की हत्या में सात लोगों के खिलाफ नामजद केस लिखा गया है। इनमें तीन लोग उमरी गांव, दो बेली गांव तथा दो मीरापट्टी के रहने वाले हैं। उनके बीच पुरानी दुश्मनी है। आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी है। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शवों का शनिवार शाम अंतिम संस्कार किया गया। घटना के बाद तनाव और आक्रोश के चलते मरियाडीह और उमरी की तरफ पुलिस और पीएसी बल की तैनाती रही। पुलिस को गैंगवार छिड़ने का खतरा सता रहा है।
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शुक्रवार रात सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में मरियाडीह के प्रधान आबिद की तरफ से धूमनगंज थाने में मुकदमा लिखा गया है। एफआईआर में आबिद ने लिखा है कि रात करीब साढ़े आठ बजे उसकी चचेरी बहन अलकमा लाल बिहारा में रहने वाले रिश्तेदार फरहान के  घर से मरियाडीह में घर के लिए रवाना हुई थी। अलकमा को आबिद की फारच्यूनर में ड्राइवर सुरजीत घर पहुंचाने जा रहा था। गाड़ी मदरसा के पहले पुलिया के निकट पहुंची तभी वहां घात लगाकर छिपे उमरी गांव के साबिर, वसी अहमद, मकसूद अहमद, मीरापट्टी धूमनगंज के सगे भाई तौसीफ और इंतेखाब आलम, बेली गांव कैंट कम्मू और जाबिर ने राइफलों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

आबिद के मुताबिक, तभी पीछे से वह भी दूसरी गाड़ी में आसिफ, मुन्ने, फरहान के साथ आ गया। फायरिंग होते देख वे सभी गाड़ी से उतरकर खेत में छिप गए। आबिद ने एफआईआर में दावा किया है कि गाड़ी की रोशनी में उसने सात लोगों को फायरिंग करते देखा और पहचान लिया। गोलियों की आवाज सुनकर गांव से तमाम लोग शोर मचाते हुए उधर आए तो हमलावर गालियां देते और फायरिंग करते भाग गए। आबिद के अनुसार, इन लोगों ने पहले भी उसे दुश्मनी के चलते जान से मारने की धमकी दी थी।
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पुलिस ने सात लोगों पर एफआईआर लिखकर छापे मारे। आरोपी नहीं मिले तो उनके कुछ करीबियों को हिरासत में लिया। इनमें बेली गांव के कम्मू तथा जाबिर के खिलाफ पहले से हत्या समेत कई आपराधिक मुकदमे हैं। प्रापर्टी के धंधे में वर्चस्व और इलाके में दबदबे के लिए उनके बीच दुश्मनी बनी। उधर, शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद अलकमा का शव मरियाडीह के कब्रिस्तान में दफन किया गया, जबकि सुरजीत का शव उसके परिजन ले गए। पोस्टमार्टम हाउस पर शहर पश्चिमी के पूर्व विधायक अशरफ और रामलोचन साहू समेत बड़ी संख्या में बमरौली इलाके के लोग मौजूद रहे।

धूमनगंज की घटना में नामजद हुए लोगों के परिवार के कुछ लोगों ने शाम को एसएसपी कैंप कार्यालय जाकर प्रार्थनापत्र दिया और कहा कि नामजदगी गलत है। आरोपियों में एक इंतेखाब आलम मरियाडीह से पिछली बार ग्राम प्रधान का प्रत्याशी था। उसका आरोप है कि मौजूदा प्रधान आबिद ने उसका नाम वोटर लिस्ट से कटवा दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने वोटर लिस्ट में उसका नाम जोड़ने का आदेश दिया। आबिद की तरफ से कई बार फर्जी फंसाने की धमकी दी जा चुकी है। कुुछ महीने पहले आरोपियों में एक तौसीफ पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें आबिद समेत अन्य के खिलाफ धूमनगंज थाने में दफा 307 का केस लिखाया गया, मगर पुलिस ने कुछ नहीं किया।

आरोपियों ने तो प्रार्थनापत्र में लिखा है कि उन्हें फंसाने के लिए घटना अंजाम दी गई। उधर, आबिद का कहना है कि हमलावरों के निशाने पर वह खुद था। संयोग से उसकी गाड़ी में चचेरी बहन अलकमा घर के लिए रवाना हो गई तो अंधेरे में ताबड़तोड़ फायरिंग में वह ड्राइवर सहित मारी गई। पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि जांच में साबित होगा कि सच क्या है। अभी नामजद आरोपियों की तलाश की जा रही है। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापामारी की जा रही है।

बमरौली के मरियाडीह गांव में फारच्यूनर के भीतर ड्राइवर सुरजीत उर्फ पप्पू तथा प्रधान आबिद की चचेरी बहन अलकमा की गोली मारकर हत्या की घटना को पुलिस दूसरे एंगल से भी देख रही है। पुलिस को इस घटना के पीछे कुछ और कहानी नजर आ रही है। भले ही अफसर जांच की बात कर रहे हैं, लेकिन पुलिस घटना के पीछे साजिश के दूसरे पहलू को भी खंगाल रही है।

प्रधान के ही गांव में हत्या और दुश्मनों की नामजदगी पर सवाल उठे हैं। यह पहली दफा है कि आरोपियों की ओर से भी नामजदगी का विरोध करते हुए कहा गया है कि आबिद ने फंसाने के लिए ऐसा कराया है। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक आबिद सैयद सरावां में ब्याही चचेरी बहन अलकमा को लेने गया था। फिर घटनास्थल से कुछ दूर पहले वह एक करीबी के यहां बकरीद पर सेंवई खाने चला गया। करीब डेढ़ दर्जन आपराधिक मुकदमों में नामजद आबिद के गढ़ में घुसकर हत्या की बात पुलिस के भी गले नहीं उतर रही है। पुलिस कई तथ्यों पर पड़ताल कर रही है। आरोपियों की घटना के वक्त लोकेशन चेक की जा रही है।

मरियाडीह के प्रधान आबिद की चचेरी बहन अलकमा की हत्या ने उसके दो मासूम बेटों से मां की गोद छीन ली। अलकमा ने सैयद सरावां के महबूब से शादी की थी। महबूब कपड़े सिलने का काम करता है। वह कई महीने से बाहर है। अलकमा दो बेटों के साथ पूरामुफ्ती के पास नया गांव में किराए के कमरे में रहती थी। पता चला है कि उसे शुक्रवार रात घर से फारच्यूनर में लाया गया था। उधर, हमले में मारे गए ड्राइवर सुरजीत उर्फ पप्पू के घर में कोहराम मचा है। पता चला कि वह आबिद का नियमित ड्राइवर नहीं था। उसे शनिवार को ही गाड़ी चलाने को बुलाया गया था।
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