जनसूचना अधिकार के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्य पर स्नातक का फर्जी अंकपत्र लगाकर खुद ही मेडलिस्ट बन जाने का सनसनीखेज खुलासा करने का दावा किया गया है। यह दावा करने वालों आरोप है कि आरटीआई से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार छात्रा ने परास्नातक में प्रथम स्थान हासिल किया था लेकिन उसे किसी मेडल से सम्मानित नहीं किया गया। परास्नातक में उससे अधिक अंक दूसरे छात्रों ने प्राप्त किए थे, जिसके लिए दूसरे छात्रों को पदक प्रदान किए गए हैं पर डॉ. रजनी को कोई पदक नहीं दिया गया।
अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी के अनुसार उन्होंने प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्य डॉ. रजनी लता त्रिपाठी के संबंध में तीन सूचनाएं शिक्षा निदेशक से मांगीं थीं। इसमें चांसलर मेडल से सम्मानित छात्र/छात्राओं के संबंध में निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा प्रशस्ति पत्र निर्गत किए जाने, बुंदेलखंड विवि, झांसी, उत्तर प्रदेश की वर्ष 1981 की बीए की परीक्षा में प्रथम स्थान एवं 1983 की पीजी परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाली छात्रा के नाम की सूचना मांगी थी।
इसके अलावा चांसलर मेडल की बाबत निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा निर्गत प्रशस्ति पत्र अवधि 1981-83 की छाया प्रति उपलब्ध कराने को कहा गया था। शिक्षा निदेशालय ने पहले सवाल का जवाब ‘जी नहीं’ में दिया है जबकि दूसरी और तीसरी सूचना को विवि से संबंधित बताया। बुंदेलखंड विवि ने इस संबंध में जो उत्तर दिए वे डॉ. रजनी त्रिपाठी की ओर से उच्च शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश की ओर से दिखाए जा रहे बीए में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर दिए गए प्रशस्ति-पत्र और बुंदेलखंड विवि की ओर से प्रदान किए गए रजत पदक पर सवाल खड़े करते हैं। अधिवक्ता का दावा है कि बुंदेलखंड विवि ने जवाब में कहा कि पीजी में प्रथम स्थान पाने वाली रजनी त्रिपाठी को किसी मेडल से सम्मानित नहीं किया गया। पीजी परीक्षा में कई छात्रों ने उनसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं जिन्हें पदक प्रदान किए गए हैं। उस सूची में डॉ. रजनी का नाम नहीं है।
विवि में 1980 से लेकर 1988 तक कोई दीक्षांत समारोह नहीं हुए। इस दौरान बीए में कोई रजत पदक नहीं प्रदान किया गया जबकि डॉ. रजनी त्रिपाठी ने जो रिकार्ड दिखाएं हैं, उसके अनुसार उन्हें स्नातक में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के लिए कुलाधिपति रजत पदक और उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया है। शिकायत करने वालों ने इसे फर्जी बताया है। शिक्षा निदेशक से शिकायत कर यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने स्नातक का जो अंकपत्र लगाया है वह गलत है। उन्हें स्नातक में 570 अंक मिले थे जबकि वह 577 अंक प्राप्त करने का दावा कर रही हैं, और उसका अंकपत्र लगा रही हैं। अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्य डॉ. रजनी त्रिपाठी ने कहा कि कुछ लोग जबरन उनके खिलाफ साजिश कर भ्रम फैला रहे हैं और गलत दस्तावेज दिखा रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ मैंने शिकायत की है, जिस पर बुंदेलखंड विवि ने उनके खिलाफ रिपोर्ट भी लिखाई है।