यमुनापार इलाके में करछना के खाईं गांव में रविवार रात दो मासूम घरेलू कलह की भेंट चढ़ गए। पति से झगड़े के बाद महिला अपने मौसा के यहां चली गई। पति और सास-ससुर घर में ताला लगाकर उसे मनाने निकल गए। मकान में दो साल की बच्ची और साल भर का बेटा चारपायी पर सो रहे थे। दुर्योग से तभी ढिबरी से आग फैली और घने धुएं से दोनों बच्चों का दम घुट गया। मां-बाप लौटे तो बच्चों के शव ही मिले। परिजनों ने शव गंगा में प्रवाहित कर दिया मगर पुलिस को सूचना मिली तो शवों की तलाश शुरू हुई। बच्ची का शव गोतोखोरों को मिल गया।
मेजा के गुलपुर गांव की रूपा का ब्याह चार साल पहले खाई गांव (करछना) के कोलान बस्ती में रहने वाले रंगबहादुर उफ रंगू से हुआ था। रंगू मजदूरी कर गुजारा करता है। उनके दो बच्चे हुए। दो साल की किरन और साल भर का मुन्ना। गरीबी के चलते पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता था। रविवार शाम भी झड़प के बाद रूपा खाई गांव में ही अपने मौसा जगतपाल के घर चली गई थी। कुछ देर बाद पति और सास-ससुर उसे मनाकर वापस लाने की खातिर उसके मौसा के घर चले गए। बेटी किरन और पुत्र मुन्ना घर में चारपायी पर सो रहे थे इसलिए बाहर से दरवाजा बंदकर ताला लगा दिया गया था। बदकिस्मती से चारपायी के पास रखी ढिबरी से बोरों में आग लग गई। आग फैलती गई। कुछ देर में आसपास के लोगों ने घर में आग और धुआं देख शोर मचाया तो रंगबहादुर अपने मां-बाप के साथ भागकर आया। दरवाजा खोला गया तो भीतर दोनों बच्चे निर्जीव पडे़ थे।
हालांकि उनका शरीर ज्यादा जुलसा नहीं था। ऐसे में शक है कि इन मासूमों की मौत घने धुएं के कारण दम घुटने से हो गई थी। सोमवार सुबह परिजनों ने बच्चों के शवों को गंगा में प्रवाहित कर दिया। किसी ने 100 नंबर पर कंट्रोल रूम में सूचना दी तो करछना थानाध्यक्ष अशोक सिंह वहां पहुंच गए। उन्होंने रंगबहादुर से पूछताछ के बाद गंगा में जाल के साथ गोताखोरों को उतारकर शवों की तलाश कराई। दोपहर में बच्ची का शव मिल गया। रंगबहादुर की पत्नी रूपा ने उस पर आरोप लगाया कि उसने ही बच्चों को जानबूझकर मार डाला। मगर थानाध्यक्ष का कहना है कि यह बच्चों को सोते छोड़ बाहर से दरवाजा बंदकर जाने की गंभीर लापरवाही थी। चारपायी के पास रखी ढिबरी या तो किसी बच्चे का पैर लगने से लुढ़की या फिर चूहों ने गिरा दिया हो। आसपास के लोगों ने भी यही बताया है कि दरवाजा बाहर से बंद था।