बहादुरपुर ब्लाक में प्रमुख पद के लिए मतदान के दौरान हुए उत्पात ने पुलिस-प्रशासन की तैयारी की पोल खोल दी है। दोपहर एक बजे ब्लाक परिसर से शुरू उत्पात शाम तक 15 किलोमीटर के इलाके में फैल गया। झूंसी से लेकर जगतपुर रेलवे क्रासिंग तक जगह-जगह पथराव से राहगीरों की फजीहत हुई। दोपहर से रात तक यातायात ठप रहा है। पूरे जिले की फोर्स पहुंची तब जाकर रात में स्थिति संभाली जा सकी। दरअसल, दो उम्मीदवारों के बीच का चुनावी झगड़ा ठाकुर बनाम यादव में बदल गया था। बवाल ज्यादा बढ़ने के पीछे यह भी एक बड़ी वजह रही।
दोपहर करीब एक बजे बहादुरपुर ब्लाक के पास समर्थकों के बीच झगड़े, मारपीट, फायरिंग के बाद भीड़ सड़क पर आ गई। बहादुरपुर बाजार और सरायइनायत बाजार से लेकर हबूसा मोड़, अंदावा, सैदाबाद, जगतपुर तक अरुणेंद्र याद उर्फ डब्बू समर्थक सड़क पर आ गए। दोपहर में तो लोग कुछ देर बाद शांत हो गए थे लेकिन शाम को नतीजा घोषित हुआ तो डब्बू समर्थक आक्रोशित हो गए।
अपने उम्मीदवार की हार से बौखलाए लोगों ने पुलिस-प्रशाशन पर ज्यादती का आरोप लगाकर पथराव कर सैकड़ों गाड़ियां तोड़ दीं। फूलपुर विधायक सईद अहमद की फारच्यूनर गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। भीड़ के आगे पुलिस की एक नहीं चली। 15 किलोमीटर तक जीटी रोड पर अराजकता हावी रही। आखिरकार पुलिस ने खुद झूंसी से सैदाबाद तक यातायात रुकवा दिया। भारी वाहनों पर रोक लगा दी गई। आलम यह हुआ कि आईजी और डीआईजी को भी पहुंचना पड़ा।
बाई का बाग स्थित निजी चिकित्सालय में मृत घोषित किए जाने के बाद देवेंद्र सिंह उर्फ बब्बू का शव स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाऊस लाया गया जहां एसपी गंगापार, एसपी सिटी समेत कई सीओ और थानेदार भी पीएसी के साथ पहुंचे थे। वहां दुखी और आक्रोशित परिजनों तथा समर्थकों की पुलिस से तीखी झड़प हो गई। हनुमानगंज चौकी प्रभारी के खिलाफ भी लोगों ने गुस्सा जताया। स्थिति पुलिस से खींचतान तक पहुंच गई थी। लगा कि वहां बवाल हो जाएगा। अफसरों ने किसी तरह स्थिति काबू में की। रात में ही पोस्टमार्टम हुआ।
बहादुरपुर ब्लाक परिसर के पास दोनों तरफ के समर्थकों के बीच नारेबाजी तो सुबह से हो रही थी लेकिन इस बवाल के लिए जिम्मेदार हनुमानगंज चौकी प्रभारी संजय सिंह सोमवंशी की नासमझी जिम्मेदार रही। दरअसल, दरोगा संजय ने दोपहर करीब एक बजे दोनों तरफ के समर्थकों को शांत कराने के लिए गलत तरीका अपनाया। सिपाहियों के साथ लाठियां पटकीं जिससे लोग उत्तेजित हो गए। राजकुमार गुट के लोगों को कुछ दूर भेजने के बाद उसने डब्बू समर्थकों पर लाठियां भांजी तो वे उत्तेजित होकर पथराव करने लगे। नतीजा मौत और दिन भर आगजनी में सामने है। लोगों ने दरोगा को ही इस घटना के लिए दोषी करार देते हुए उसे निलंबित करने की मांग कर दी है।
देवेंद्र सिंह उर्फ बब्बू के कत्ल से परिवार में हाहाकार मच गया है। बब्बू की मां दुर्गावती लगातार दूसरी बार हंडिया के डुबकी कला की प्रधान चुनी गई हैं। प्रधान चुने जाने की खुशी बब्बू के कत्ल से भारी गम में बदल गई है। बब्बू के पिता यज्ञनारायण गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। बब्बू ने हंडिया कस्बे में फोटोस्टेट की दुकान खोल रखी थी। वही अपनी मां की प्रधानी का कामकाज भी देखता था।
बब्बू तीन भाइयों में मंझला था। सबसे बड़े भाई धमेंद्र की करीब दस साल पहले एक घटना में घायल होने के बाद मौत हो गई थी। तब से बब्बू ही परिवार का सहारा बना था। सबसे छोटा शिवम एलएलबी की पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करता है। बब्बू की पत्नी सरिता सिंह का तो रो-रोकर ऐसा हाल हुआ कि वह कई बार बेसुध हो गई। उसके तीन बच्चे हैं-12 साल का आर्या, दस साल का सार्थक और आठ साल का संस्कार। गोली लगने से बब्बू की मौत की जानकारी घर पहुंची तो हाहाकार मच गया। शाम तक वहां गम में डूबे ग्रामीणों और रिश्तेदारों का मजमा लग गया था।
‘दोनों गुटों के बीच टकराव के बाद फायरिंग में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई। इसे हत्या ही मानकर जांच की जा रही है। गोली मारने के एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। कई लोग हिरासत में है। घटना में अज्ञात के खिलाफ तहरीर मिली है। शाम तक स्थिति संभाल ली गई। अगर इस घटना के लिए किसी दरोगा की लापरवाही है तो उसके खिलाफ भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।’
0जीतेंद्र कुमार शाही, डीआईजी