यमुनापार के औद्योगिक क्षेत्र इलाके से एसटीएफ ने इलाकाई पुलिस के साथ घेरेबंदी कर दो गांजा तस्करों को पकड़ा है। तस्कर बोलेरों के अंदर बने खास तौर पर तस्करी के लिए केबिन में छिपा कर गांजा ला रहे थे। तलाशी में तीन कुंतल चौतीस किलो गांजा बरामद हुआ है। पूछताछ में शातिरों ने कबूला की माघ मेला में सप्लाई के लिए यह खेप लाई जा रही थी। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस गिरोह के सरगना और इस काले कारोबार में लिप्त अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट को मुखबिर के जरिए सूचना मिली की भारी मात्रा में गांजे सप्लाई के लिए आ रहा है। इस सूचना पर सीओ एसटीएफ प्रवीण सिंह चौहान ने अपनी टीम के एसआई अजय सिंह, अतुल कुमार सिंह को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया। एसटीएफ ने एसओ औद्यागिक क्षेत्र राजेश कुमार सिंह के साथ मवैया मोड़ के पास घेरेबंदी की। तभी दो संदिग्ध बोलेरो गाड़ी निकली। जिसे पुलिस ने रोकना चाहा तो चालक बोलेरो लेकर भागे। पुलिस ने दौड़ाकर दोनों बोलेरो रोक लिया। बोलेरो चालक मांडा के टिकुरी गांव का नरेंद्र कुमार और मांडा के ही बरहा कला गांव का भाई लाल पटेल को पकड़ लिया। उनसे पूछताछ की गई तो वे पुलिस को गुमराह करते रहे।
लेकिन जब बोलेरो की गहनता से पूछताछ की गई तो बोलेरो के अंदर खास तौर तैयार केबिन में गांजा भरा हुआ मिला। दोनों बोलेरो से लगभग तीन कुंतल 34 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वे गांजा की खेप माघ मेला में सप्लाई करने के लिए ला रहे थे। गांजा उन्हें मांडा के एक युवक के जरिए मिलता है। जिसे आंध्र प्रदेश और उड़ीसा से लाया जाता है। यहां के आसपास के जिलों में छोटे तस्करों को सप्लाई करने के लिए गांजा पहुंचाते हैं। आरोपियों ने बताया कि उनका सरगना मांडा का त्रिशूल है। जो कई सालों से इस काले कारोबार में लिप्त है। त्रिशूल को पांच हजार रुपये किलोग्राम में मिलता हे। जिसे वह दस हजार रुपये तक में छोटे तस्करों को बेंचता है। एक खेप पहुंचाने का त्रिशूल नरेंद्र और भाई लाल को पांच हजार रुपये देता है। एसटीएफ पूछताछ के बाद अन्य आरोपियों की तलाश में लगी है।